133 वोटों से जीत: दिल्ली नगर निगम (MCD) में दो साल बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सत्ता में वापसी के साथ, पार्टी ने सरदार राजा इकबाल सिंह को महापौर के रूप में चुना है।
उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार मनदीप सिंह को 133 वोटों से हराया, जबकि मनदीप सिंह को केवल 8 वोट मिले। यह जीत न केवल MCD में BJP की सत्ता में वापसी का प्रतीक है, बल्कि दिल्ली में केंद्र, राज्य और नगर निगम स्तर पर ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की स्थापना भी सुनिश्चित करती है।
133 वोटों से जीत: सरदार राजा इकबाल सिंह का व्यक्तिगत और शैक्षिक जीवन
सरदार राजा इकबाल सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ और उनकी उम्र 51 वर्ष है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की और बाद में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से एलएलबी (कानून) की पढ़ाई पूरी की।
जानकारी के अनुसार, वह पहले अमेरिका में व्यापार से जुड़े थे। उनके ससुराल पक्ष की राजनीतिक विरासत ने उन्हें भारत लौटने और स्थानीय राजनीति में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। उनके ससुराल से तीन बार पार्षद चुने गए व्यक्ति की विरासत को उन्होंने आगे बढ़ाया।
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राजनीतिक यात्रा अकाली दल से BJP तक
राजा इकबाल सिंह की राजनीतिक शुरुआत शिरोमणी अकाली दल से हुई, जो पंजाब और दिल्ली में सिख समुदाय के बीच मजबूत आधार रखती है। उन्होंने 2017 में जीटीबी नगर से पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस समय वह अकाली दल के टिकट पर BJP के समर्थन से चुनाव लड़े थे। उनकी दूसरी जीत 2022 में मुखर्जी नगर वार्ड से आई।
सितंबर 2020 में राजा इकबाल सिंह ने अकाली दल छोड़कर BJP में शामिल होने का फैसला किया। यह उस समय की बात है जब अकाली दल ने केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में NDA से समर्थन वापस ले लिया था। अकाली दल ने उन्हें निगम के पदों से इस्तीफा देने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। इसके कुछ महीने बाद, BJP ने उन्हें उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) का महापौर बनाया।
MCD में भूमिका और कार्यकाल
2021 में राजा इकबाल सिंह ने NDMC के महापौर के रूप में कार्य किया और 2020 तक वह सिविल लाइंस जोन के प्रमुख रहे। हाल के वर्षों में वह MCD में विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय थे, जहां उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उनकी साफ-सुथरी छवि और अनुभव ने उन्हें BJP के लिए एक भरोसेमंद चेहरा बनाया।
राजा इकबाल सिंह को महापौर बनाकर BJP सिख वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। सिख नेता राजा इकबाल सिंह अकाली दल की पृष्ठभूमि से आते हैं, इस समुदाय के बीच स्वीकार्यता रखते हैं। BJP ने उनकी इस छवि का इस्तेमाल सिख वोटों को मजबूत करने के लिए किया, खासकर तब जब AAP और कांग्रेस भी इस समुदाय को लुभाने की कोशिश कर रहे थे।
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प्राथमिकताएँ और योजनाएँ
महापौर के रूप में अपने पहले संबोधन में, राजा इकबाल सिंह ने दिल्ली की सफाई व्यवस्था में सुधार, जलभराव की समस्या का समाधान और नागरिकों को बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर पूरी निष्ठा और मेहनत से काम करेंगे।
‘ट्रिपल इंजन’ सरकार की दिशा में सुदृढ़ कदम
राजा इकबाल सिंह की महापौर के रूप में नियुक्ति BJP के लिए एक रणनीतिक कदम है, जो न केवल सिख समुदाय के बीच पार्टी की स्वीकार्यता को बढ़ाता है, बल्कि MCD में प्रभावी और पारदर्शी शासन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी राजनीतिक यात्रा और कार्यकाल यह दर्शाते हैं कि वे एक सक्षम और प्रतिबद्ध नेता हैं, जो दिल्ली की जनता की सेवा में पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।





