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RAJASTHAN HC: आरोपी महिला को कनाडा जाने की अनुमति दी

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RAJASTHAN HC: राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक महिला को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में छह महीने के लिए

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RAJASTHAN HC: राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक महिला को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में छह महीने के लिए कनाडा जाने की अनुमति दी है, ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और अपनी बेटी की कनाडाई नागरिकता रद्द होने से बचा सके।

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इस फैसले से पहले, याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में एक आपराधिक विविध याचिका दायर की थी, जिसमें उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी विदेश यात्रा और पासपोर्ट जारी करने की याचिका को खारिज कर दिया गया था।

यह मामला उस महिला से संबंधित है, जो अपने परिवार और व्यक्तिगत कारणों से विवादों में उलझी हुई थी, और जिनके खिलाफ धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, जालसाजी और विश्वासघात के आरोप लगाए गए थे। न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की स्थिति को उचित शर्तों के साथ हल किया जा सकता है, जो लोक अभियोजक की चिंताओं को भी संबोधित करती है।

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RAJASTHAN HC: मामले का संक्षिप्त विवरण

याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं – 420 (धोखाधड़ी), 406 (विश्वासघात), 467 (जालसाजी), 468 (फर्जीवाड़ा), 470 (जालसाजी का उपकरण), 384 (अपहरण और धमकी) और 120-B (साजिश) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। महिला ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष यह आवेदन किया था कि उसने कनाडा में बीबीए (BBA) कोर्स में प्रवेश लिया है और उसे तीन साल का अध्ययन वीजा मिला है, जिसके तहत वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उसने कनाडा में रहते हुए एक बेटी को जन्म दिया, जो कनाडा की नागरिक है। उसके बाद, उसके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जिसके बाद वह अपनी बेटी के साथ ससुराल में आई। ससुराल में उसे मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उसने अपने ससुराल वालों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। लेकिन इसके जवाब में, उसके ससुराल वालों ने भी उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाई, जिससे उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया और वह कनाडा नहीं जा सकी।

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RAJASTHAN HC: कनाडा में बेटी की नागरिकता के खतरे को ध्यान में रखते हुए

याचिकाकर्ता का कहना था कि कनाडा के नियमों के अनुसार यदि उसकी बेटी 180 दिनों से अधिक समय तक भारत में रहेगी, तो उसकी कनाडाई नागरिकता रद्द हो सकती है। इसलिए, महिला ने कोर्ट से यह मांग की थी कि उसे पासपोर्ट जारी किया जाए और कनाडा जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वह अपनी बेटी के नागरिकता अधिकारों को सुरक्षित रख सके और अपनी पढ़ाई को भी पूरा कर सके।

न्यायमूर्ति फरजंद अली की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करते हुए कहा कि चूंकि महिला ने बीबीए कोर्स में प्रवेश लिया है और उसकी जांच अभी चल रही है, इसलिए इस स्तर पर उसे अध्ययन जारी रखने से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता का भविष्य इस पर निर्भर करता है कि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सके, और अगर उसकी बेटी कनाडा नहीं लौटती तो उसकी नागरिकता खतरे में पड़ सकती है।” न्यायालय ने आगे यह कहा कि लोक अभियोजक की जो चिंता है, उसे उचित शर्तों के तहत हल किया जा सकता है।

कोर्ट ने इस आधार पर याचिकाकर्ता को कनाडा जाने की अनुमति दी। हालांकि, यह अनुमति कुछ शर्तों के अधीन थी। अदालत ने याचिकाकर्ता की मां से यह शर्त रखी कि वह अदालत में यह आश्वासन देगी कि याचिकाकर्ता छह महीने बाद भारत लौटेगी। यदि वह समय पर वापस नहीं आई, तो याचिकाकर्ता और उसकी मां को अदालत में 5,00,000 रुपये जमा करने होंगे।

RAJASTHAN HC: न्यायालय ने क्या कहा

न्यायालय ने कहा कि, “इस मामले में याचिकाकर्ता को एक मौका दिया जाना चाहिए ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और साथ ही वह अपनी बेटी की कनाडा की नागरिकता की सुरक्षा भी कर सके।”

इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि जब तक किसी आरोपी पर दोषी होने का प्रमाण नहीं होता, तब तक उसे अपनी शिक्षा और अन्य जीवन के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही, न्यायालय ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता की बेटी की नागरिकता रद्द होने का खतरा था और उसके लिए यह निर्णय किया गया।

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कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छह महीने के लिए कनाडा जाने की अनुमति दी और आदेश दिया कि उसका पासपोर्ट जारी किया जाए। यह अनुमति केवल तब तक वैध रहेगी, जब तक याचिकाकर्ता शर्तों का पालन करेगी। अगर वह निर्धारित समय में लौटती है, तो उसका भविष्य उज्जवल रहेगा, लेकिन अगर वह शर्तों का उल्लंघन करती है, तो अदालत में वित्तीय दंड का सामना करना होगा।

मामला: जसविंदर कौर बनाम राजस्थान राज्य [2024:RJ-JD:45692]

न्यायमूर्ति की उपस्थिति: न्यायमूर्ति फरजंद अली
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व: अधिवक्ता जयपाल सिंह
प्रतिवादी राज्य का प्रतिनिधित्व: अतिरिक्त महाधिवक्ता श्रीराम चौधरी

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