Chandni Chowk Underground Wiring से बदलेगी पुरानी दिल्ली की तस्वीर। मंडोली ग्रिड और 4 BESS प्रोजेक्ट्स से लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत।
दिल्ली सरकार ने राजधानी के ऐतिहासिक और ऊर्जा ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। Chandni Chowk Underground Wiring परियोजना के तहत पुरानी दिल्ली की 28 ऐतिहासिक सड़कों और गलियों में ऊपर लटकती बिजली की तारों को जमीन के नीचे किया जाएगा। लगभग 159.75 करोड़ रुपये की लागत से 52.5 किलोमीटर लंबी ओवरहेड लाइन को अंडरग्राउंड किया जाएगा।
इसके साथ ही मंडोली में 66/11 केवी जीआईएस ग्रिड सब-स्टेशन और शिवालिक, द्वारका व गोयला खुर्द में चार बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे विकास और विरासत संरक्षण का संतुलित मॉडल बताया। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने दावा किया कि दिल्ली का पावर सेक्टर देश के लिए उदाहरण बनेगा।
Chandni Chowk Underground Wiring: विरासत और सौंदर्य संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
Chandni Chowk Underground Wiring परियोजना केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुरानी दिल्ली का प्रमुख इलाका चांदनी चौक वर्षों से बिजली के उलझे तारों और खंभों से प्रभावित रहा है।
इस परियोजना के अंतर्गत:
- 52.5 किमी ओवरहेड लाइन भूमिगत होगी
- 500 नए फीडर पिलर लगाए जाएंगे
- सजावटी स्ट्रीट लाइट पोल स्थापित होंगे
- ‘डिजिटल ट्विन’ तकनीक से निगरानी होगी
लगभग 10,000 उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। आग और शॉर्ट सर्किट की घटनाओं में कमी आएगी। ऐतिहासिक इमारतों का दृश्य सौंदर्य बढ़ेगा और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल तार हटाने का काम नहीं, बल्कि शाहजहानाबाद क्षेत्र के समग्र पुनर्विकास का हिस्सा है। 28 सड़कों के पुनर्विकास, पार्किंग, अतिक्रमण हटाने और स्वच्छता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Widow Pension Ayushman Scheme में विधवा-दिव्यांग को बड़ी राहत
Delhi Metro Station Renaming: 21 नामों पर बड़ा फैसला
Chandni Chowk Underground Wiring के साथ 1000 करोड़ का व्यापक विकास विजन
Chandni Chowk Underground Wiring परियोजना व्यापक अवसंरचना सुधार की शुरुआत है। पहले 100 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की गई थी, जिसे बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये तक ले जाने का संकेत दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने शाहजहानाबाद पुनर्विकास बोर्ड की जिम्मेदारी स्वयं संभालने की घोषणा की। इसका उद्देश्य:
- यातायात प्रबंधन
- भूमिगत केबलिंग
- स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय
- सुरक्षित पैदल मार्ग
यह मॉडल विरासत संरक्षण + स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का संयोजन प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो पुरानी दिल्ली का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है।
मंडोली ग्रिड सब-स्टेशन: उत्तर-पूर्वी दिल्ली को स्थिर बिजली आपूर्ति
मंडोली में 66/11 केवी जीआईएस ग्रिड सब-स्टेशन की स्थापना से करीब 1.5 लाख उपभोक्ताओं को फायदा होगा। 63 एमवीए क्षमता वाली इस परियोजना पर 55.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे और 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है।
यह ग्रिड मंडोली, हर्ष विहार, बैंक कॉलोनी सहित कई इलाकों को स्थिर बिजली देगा। महत्वपूर्ण संस्थानों जैसे Rajiv Gandhi Super Speciality Hospital, मंडोली जेल और डीटीसी ईवी बस डिपो को भी विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
वोल्टेज फ्लक्चुएशन और बार-बार कटौती की समस्या में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
BESS Projects: स्वच्छ और स्मार्ट ऊर्जा की ओर दिल्ली का कदम
दिल्ली में चार नई बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाएं शुरू की गई हैं। कुल 55.5 मेगावाट / 111 मेगावाट-घंटा क्षमता वाली इन परियोजनाओं से 2.22 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
- शिवालिक – 50,000 उपभोक्ता
- द्वारका (G-5) – 1,28,000
- द्वारका (G-7) – 16,000
- गोयला खुर्द – 28,000
मार्च 2027 तक इन्हें चालू करने का लक्ष्य है। पीक डिमांड के दौरान यह सिस्टम अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराएगा।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि किलोकरी में 20 मेगावाट का स्टैंडअलोन BESS प्रोजेक्ट पहले से संचालित है। साथ ही 17,000 करोड़ रुपये की तीन वर्षीय बिजली ढांचा योजना तैयार की गई है।
| परियोजना | लागत | क्षमता | लाभार्थी |
|---|---|---|---|
| Chandni Chowk Underground Wiring | ₹159.75 करोड़ | 52.5 किमी | 10,000 |
| मंडोली ग्रिड | ₹55.5 करोड़ | 63 MVA | 1.5 लाख |
| 4 BESS प्रोजेक्ट | — | 55.5 MW | 2.22 लाख |

