OPERATION SINDOOR: बिहार की सियासत इस समय राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगी नजर आ रही है। पुलवामा के बाद अब पहलगाम हमले ने राजनीतिक दलों को एक बार फिर देशभक्ति के मोर्चे पर खड़ा कर दिया है।
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी कांग्रेस के बीच राष्ट्रप्रेम और सुरक्षा को लेकर शब्दों की जंग तेज हो गई है। एक ओर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का ढोल पीटा जा रहा है, तो दूसरी ओर इस ऑपरेशन की अधूरी तस्वीर सामने रख विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है।
OPERATION SINDOOR: ऑपरेशन सिंदूर सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट-2?
OPERATION SINDOOR: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दरअसल भारतीय सेना द्वारा हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में किए गए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान का कोडनेम है। इसमें उन आतंकियों को निशाना बनाया गया जो भारतीय सेना पर हमले के लिए जिम्मेदार थे। इस ऑपरेशन को भाजपा ने ‘राष्ट्र की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई’ के तौर पर प्रस्तुत किया है। ऑपरेशन की सफलता का जश्न मनाने के लिए भाजपा पूरे देश में ‘तिरंगा यात्रा’ निकाल रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता के बीच राष्ट्रभक्ति का भाव मजबूत करना और सेना के पराक्रम का सम्मान करना बताया जा रहा है।
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बिहार में ‘तिरंगा यात्रा’ की गूंज
बिहार भाजपा इस तिरंगा यात्रा को ऑपरेशन सिंदूर के साथ जोड़ते हुए गांव-गांव, शहर-शहर इसे पहुंचा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के नेतृत्व में यह यात्रा ब्लॉक स्तर तक आयोजित की जा रही है। बीजेपी का कहना है कि यह यात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। इसके माध्यम से भाजपा समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्र की रक्षा और राष्ट्रीय एकता के संदेश से जोड़ना चाहती है।
जायसवाल का कहना है, “देश की सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकता है। हम इस बहादुरी को हर नागरिक तक पहुंचाएंगे ताकि लोग सेना और देश की सुरक्षा नीतियों के प्रति जागरूक हों।”
विपक्ष का हमला ऑपरेशन सिंदूर अधूरा?
जहां भाजपा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूरे जोश में है, वहीं कांग्रेस पार्टी इस अभियान को अधूरा बताते हुए सवालों की बौछार कर रही है। बिहार कांग्रेस ने एक प्रतीकात्मक पोस्टर जारी किया जिसमें राष्ट्रीय ध्वज का आधा हिस्सा दिखाया गया है और लिखा गया है: “ऑपरेशन सिंदूर अधूरा है, जब तक पहलगाम के दरिंदे जिंदा हैं।”
इस पोस्टर के जरिए कांग्रेस ने न केवल सरकार के दावों पर सवाल उठाया, बल्कि यह भी कहा कि सरकार ने केवल आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जबकि पहलगाम हमले के चार मुख्य आतंकी अभी तक जीवित हैं और आज़ाद घूम रहे हैं।
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौर ने बयान जारी कर कहा, “देश जानना चाहता है कि पहलगाम में सीआरपीएफ जवानों की शहादत का बदला लेने की बात करने वाली सरकार, उन चार आतंकियों के खिलाफ कौन सी कार्रवाई कर रही है? ऑपरेशन सिंदूर अधूरा है, जब तक ये आतंकवादी ज़िंदा हैं।”
जेडीयू की चुप्पी टूटी कांग्रेस पर पलटवार
इस पूरे विवाद में अबतक शांत नजर आ रही जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) ने भी अपनी चुप्पी तोड़ दी है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कांग्रेस के पोस्टर और बयानों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि, “बिहार कांग्रेस ने पहलगाम हमले के चार आतंकियों की तस्वीरें तो पोस्ट कीं, लेकिन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सेना प्रमुख को टैग तक नहीं किया। यदि कांग्रेस के पास साक्ष्य हैं, तो उन्हें सुरक्षा एजेंसियों को सौंपना चाहिए था। यह एक राष्ट्रीय कर्तव्य है।”
नीरज ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे को भी एक प्रतीकात्मक विरोध और सोशल मीडिया ड्रामे में बदल दिया। उन्होंने इसे सर्वदलीय एकता के खिलाफ बताया और कहा कि आतंकवाद जैसे विषय पर राजनीति नहीं, एकजुटता की जरूरत है।
राजनीतिक नफे-नुकसान की गणित
बिहार इस समय चुनावी मोड में है और राष्ट्रभक्ति की राजनीति का असर मतदाताओं पर गहराई से पड़ता है। भाजपा को भरोसा है कि ऑपरेशन सिंदूर और तिरंगा यात्रा जैसे अभियानों के जरिए वह जनता को यह संदेश दे सकेगी कि केवल वही पार्टी है जो देश की रक्षा और आतंकवाद से लड़ने में सक्षम है।
दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल यह दिखाना चाहते हैं कि भाजपा सिर्फ प्रतीकवाद की राजनीति कर रही है और वास्तविक सवालों से बच रही है। कांग्रेस के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक आधी तस्वीर है, जिसे प्रचार के रूप में परोसा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों ही दल राष्ट्रभक्ति के प्रतीकों और भावनाओं का इस्तेमाल अपनी-अपनी रणनीति के तहत कर रहे हैं। जहां भाजपा राष्ट्रभक्ति की लहर पर सवार होकर वोट बैंक मजबूत करना चाहती है, वहीं कांग्रेस इस लहर में सरकार की खामियों को उजागर करने का प्रयास कर रही है।
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क्या जनता देख रही है सब कुछ?
सवाल यह भी है कि जनता इस पूरे घटनाक्रम को किस नजर से देख रही है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गर्व है, लेकिन साथ ही यह भी एक सत्य है कि देश ने पहलगाम जैसे हमलों में जवान खोए हैं और जिन आतंकियों पर संदेह है, वे अभी तक जीवित हैं। ऐसे में केवल प्रतीकों से लोगों की भावना को तुष्ट करना मुश्किल है। आम आदमी यह जानना चाहता है कि सुरक्षा नीति और रणनीति के स्तर पर क्या ठोस परिणाम सामने आए हैं।
राष्ट्रभक्ति बनाम राजनीतिक बिसात
बिहार की राजनीति में राष्ट्रभक्ति अब सिर्फ भाव नहीं, एक रणनीतिक हथियार बन गया है। ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के जरिए राजनीतिक दल चुनावी बिसात पर अपनी-अपनी चालें चल रहे हैं। भाजपा तिरंगा यात्रा से देश की एकता और शक्ति का संदेश दे रही है, तो कांग्रेस उन अधूरे सवालों को उठा रही है जो जनता के मन में हैं। जेडीयू जैसे सहयोगी दल संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
यह कहना मुश्किल है कि कौन-सी रणनीति वोटरों को अधिक प्रभावित करेगी, लेकिन इतना तय है कि बिहार की सियासत फिलहाल तिरंगे के इर्द-गिर्द घूम रही है। इस बार राष्ट्रभक्ति भी चुनावी मुद्दा बनेगी और प्रतीक भी।









