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KARNATAKA HC: पत्नी को अपराध मामले में नहीं घसीटा जा सकता

हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फेसला 2024 10 10T145413.336

KARNATAKA HC: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सिर्फ इसलिए कि पत्नी अपने पति के साथ रह रही है, उसे किसी

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KARNATAKA HC: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सिर्फ इसलिए कि पत्नी अपने पति के साथ रह रही है, उसे किसी अपराध में आरोपी नहीं ठहराया जा सकता। यह आदेश उस अपील से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता ने अतिरिक्त सिविल जज और JMFC द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को अपराध के मामले में आरोपी तब तक नहीं ठहराया जा सकता, जब तक उसके खिलाफ इस मामले में पर्याप्त सबूत न हों।

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KARNATAKA HC: मामला और अपील

याचिकाकर्ता ने इस मामले में अपनी अपील में यह दावा किया था कि पत्नी को चौथे आरोपी के रूप में सम्मिलित किया जाए, क्योंकि वह अपने पति के साथ रह रही थी और वह भी कथित अपराध में शामिल थी। याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया कि आरोपी नंबर 3 (पत्नी का पति) और अन्य आरोपियों द्वारा नकली शराब का व्यापार किया जा रहा था, और पत्नी को इसमें संलिप्त माना जाना चाहिए था, क्योंकि वह उनके साथ रहती थी और उसे इन गतिविधियों का पूरा ज्ञान था।

कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एम. नागाप्रसन्ना की एकल पीठ ने इस याचिका पर विचार करते हुए कहा, “यह कहना कि केवल आरोपी नंबर 3 की पत्नी होने के कारण वह अपराध में शामिल है, सही नहीं है।” अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में सम्मिलित किया जाना है, तो इसके लिए पर्याप्त सबूत की आवश्यकता होती है।

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अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 319 का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में सम्मिलित करने के लिए यह आवश्यक है कि उस पर पर्याप्त सबूत हों, जो यह साबित कर सके कि वह अपराध में शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के शंकर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला देते हुए, न्यायालय ने कहा कि धारा 319 का उपयोग तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक मामले की सुनवाई शुरू नहीं हो जाती और पर्याप्त प्रमाण नहीं होते।

KARNATAKA HC: प्रमाण और सुनवाई

न्यायालय ने आगे कहा कि इस मामले में, पत्नी के खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं थे, जो यह साबित कर सके कि उसने अपने पति के साथ मिलकर नकली शराब का कारोबार किया था। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि पति और पत्नी को एक ही अपराध में आरोपी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि पत्नी ने उस अपराध में कोई सक्रिय भूमिका निभाई है।

अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह आवेदन “गलत उद्देश्य” से दायर किया गया था और इसे “प्रारंभिक परीक्षण” के स्तर पर दायर करना अनुचित था। अदालत ने यह भी कहा कि अगर इस प्रकार के आवेदन स्वीकार किए जाते हैं, तो यह गलत तरीके से किसी के खिलाफ आरोप लगाने का रास्ता खोल सकता है, बिना यह साबित किए कि वह अपराध में शामिल था।

KARNATAKA HC: कानूनी दृष्टिकोण

इस फैसले में, कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को आरोपी ठहराने के लिए सबूत होना जरूरी है, और यह कि कोई भी पत्नी सिर्फ इस आधार पर आरोपी नहीं ठहराई जा सकती कि वह अपने पति के साथ रह रही है। अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 319 के तहत किसी व्यक्ति को आरोपी बनाने के लिए एक उच्च स्तर के प्रमाण की आवश्यकता होती है, जो मामले की जांच के दौरान प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

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यह मामला कर्नाटक में एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय के रूप में सामने आया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को उसके संबंधों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने यह सिद्धांत स्थापित किया कि यदि एक व्यक्ति ने अपराध किया है, तो उस पर पर्याप्त प्रमाण होने चाहिए, और यह नहीं हो सकता कि केवल किसी के साथ रहने के कारण किसी अन्य व्यक्ति को अपराध में शामिल मान लिया जाए।

मामला: श्री आर.के. भट बनाम श्रीमती शांति रोचे
न्यूट्रल सिटेशन: 2024: KHC: 43494
प्रस्तुतकर्ता: अधिवक्ता राजाशेखर एस.
प्रतिवादी: अतिरिक्त एसपीपी बी.एन. जगदीश

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