headlines live newss

KERALA HIGH COURT: पत्नी की सहमति के बिना आभूषण गिरवी रखने पर पति की सजा बरकरार

हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फेसला 2024 09 13T115500.710

KERALA HIGH COURT: केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दोहराया है कि यदि पति या परिवार का कोई अन्य सदस्य ईमानदारी से स्त्रीधन का

Table of Contents

KERALA HIGH COURT: केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दोहराया है कि यदि पति या परिवार का कोई अन्य सदस्य ईमानदारी से स्त्रीधन का दुरुपयोग करता है या उसे अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए बदलता है, तो उसे आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के तहत दोषी ठहराया जा सकता है। यह फैसला एक पति द्वारा अपनी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनाया गया, जिसे उसकी पत्नी ने अपने स्त्रीधन के गहनों के दुरुपयोग के लिए आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दोषी ठहराया था।

kerala high court

इस मामले में न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्त्रीधन की संपत्ति की सौंपने (एंट्रस्टमेंट) की अवधारणा को मान्यता दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के “रश्मि कुमार बनाम महेश कुमार भादा [(1997) 2 SCC 397]” के मामले में कहा गया था कि जब पति या परिवार का कोई अन्य सदस्य स्त्रीधन का बेईमानी से दुरुपयोग करता है या उसे अपने उपयोग में परिवर्तित करता है, तो वह आपराधिक विश्वासघात के दोषी माने जाते हैं।

इसी प्रकार, केरल हाईकोर्ट ने यह माना कि निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने सही तरीके से आरोपी पति को आईपीसी की धारा 406 के तहत दोषी ठहराया।

ALLAHABAD HIGH COURT: राज्य विधि आयोग अध्यक्ष की पेंशन हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश को भी योग्य

SUPREME COURT: पत्नी अनाचार संबंध में बाधा बनी, हत्या की सजा बरकरार रखी

KERALA HIGH COURT: मामले के तथ्य

यह मामला एक पति से संबंधित था, जिस पर उसकी पत्नी ने आरोप लगाया कि उसने विवाह के समय उसे उसकी मां द्वारा उपहार में दिए गए 50 तोला सोने के गहनों को बैंक लॉकर में सुरक्षित रखने का वादा किया था। हालाँकि, बाद में पति ने बिना पत्नी की सहमति के इन गहनों को मुथूट फिनकॉर्प, कासरगोड में गिरवी रख दिया। इस तरह से पति ने विश्वासघात किया और अपनी पत्नी के स्त्रीधन का बेईमानी से दुरुपयोग किया।

इसके अलावा, पति पर यह आरोप भी था कि उसने इसके लिए जाली दस्तावेज तैयार किए और उन्हें असली के रूप में पेश किया, जिससे उसने अपनी पत्नी को धोखा दिया। ट्रायल कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने आईपीसी की धारा 406 के तहत विश्वासघात का मामला साबित कर दिया, जबकि अन्य आरोपों से पति को बरी कर दिया गया। इसके अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पति को छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई।

KERALA HIGH COURT: अपील और फैसला

इस मामले में पति और पत्नी दोनों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। पति ने अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की, जबकि पत्नी ने ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए आर्थिक जुर्माने को अपर्याप्त मानते हुए इसे बढ़ाने की अपील की। इसके बाद, सेशंस कोर्ट ने दोनों अपीलों पर विचार किया और पाया कि आरोपी पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 के तहत सजा सही और उचित थी। अदालत ने कहा कि पति ने अपनी पत्नी के स्त्रीधन का दुरुपयोग किया था, इसलिए उसे दोषी ठहराया गया।

सेशंस कोर्ट ने न केवल पति की अपील खारिज की बल्कि पत्नी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पति को ₹50,000 का जुर्माना भी भरना होगा। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए कहा कि जुर्माने की राशि में वृद्धि की जाए और उसे अधिक उचित और न्यायसंगत बनाया जाए।

KERALA HIGH COURT: अदालत की टिप्पणी

Headlines Live News

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने विस्तार से सुप्रीम कोर्ट के रश्मि कुमार बनाम महेश कुमार भादा के फैसले का हवाला दिया, जिसमें यह कहा गया था कि पति या उसके परिवार के अन्य सदस्य अगर स्त्रीधन का दुरुपयोग करते हैं, तो वे आपराधिक विश्वासघात के दोषी होंगे। अदालत ने कहा, “आरोपी ने सोने के गहनों को बैंक लॉकर में सुरक्षित रखने के बजाय बेईमानी से उनका दुरुपयोग किया और उन्हें मुथूट फिनकॉर्प में गिरवी रख दिया। इस प्रकार उसने पत्नी के साथ विश्वासघात किया, जिससे पत्नी को आर्थिक नुकसान हुआ।”

अदालत ने यह भी कहा कि आईपीसी की धारा 406 के तहत अपराध के सभी तत्व इस मामले में स्पष्ट रूप से स्थापित हैं। आरोपी ने विश्वासघात किया, और इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अपराध को सफलतापूर्वक साबित कर दिया।

KERALA HIGH COURT: अंतिम फैसला

अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए पाया कि ट्रायल कोर्ट और सेशंस कोर्ट दोनों के फैसले सही हैं। अभियुक्त पति द्वारा किए गए अपराध को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने उसकी सजा और जुर्माने को बरकरार रखा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियुक्त ने न केवल अपनी पत्नी के स्त्रीधन का दुरुपयोग किया बल्कि उसे धोखा भी दिया। अदालत ने अपील को खारिज करते हुए आरोपी पति की सजा को बरकरार रखा और आदेश दिया कि उसे लगाए गए जुर्माने का भुगतान भी करना होगा।

Headlines Live News

मामला शीर्षक: सुरेंद्र कुमार बनाम केरल राज्य (2024:KER:76979)
प्रतिनिधित्व:
अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता पी.के. सुभाष और डेनिक एंटनी
प्रतिवादी की ओर से सरकारी वकील रंजीत जॉर्ज

इस प्रकार, इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया कि स्त्रीधन के मामले में पति या परिवार के अन्य सदस्य द्वारा बेईमानी से दुरुपयोग करना गंभीर अपराध है और इसके लिए सख्त सजा दी जा सकती है।

News Letter Free Subscription

Facebook
WhatsApp
Twitter
Threads
Telegram
Picture of Headlines Live News Desk

Headlines Live News Desk

Headlines Live News Desk हमारी आधिकारिक संपादकीय टीम है, जो राजनीति, क्राइम और राष्ट्रीय मुद्दों पर तथ्यात्मक और विश्वसनीय रिपोर्टिंग करती है।

All Posts

संबंधित खबरें

Leave a comment