Kerala to Keralam Name Change को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी। अब संविधान संशोधन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जानिए पूरी जानकारी।
देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा है। Kerala to Keralam Name Change प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ‘केरल’ का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ किया जाए।
यह प्रस्ताव अब संवैधानिक प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश करेगा। राज्य की विधानसभा पहले ही इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर चुकी है। नाम परिवर्तन का उद्देश्य मलयालम भाषा में प्रचलित मूल नाम ‘केरलम’ को संवैधानिक मान्यता देना है।
Kerala to Keralam Name Change केवल नाम का बदलाव नहीं, बल्कि भाषाई और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा निर्णय माना जा रहा है। अब यह प्रक्रिया संविधान के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ेगी।
Kerala to Keralam Name Change: संवैधानिक प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी?
Kerala to Keralam Name Change को लागू करने के लिए संविधान के Article 3 के तहत प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
प्रक्रिया के मुख्य चरण:
- केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति
- प्रस्तावित विधेयक राष्ट्रपति को भेजा जाएगा
- राष्ट्रपति इसे राज्य विधानसभा को राय देने हेतु भेजेंगे
- विधानसभा की राय के बाद संसद में विधेयक पेश होगा
- संविधान की First Schedule में संशोधन
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। राज्य सरकार का तर्क है कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा में ऐतिहासिक रूप से प्रचलित है।
Kerala to Keralam Name Change के बाद सरकारी दस्तावेजों, आधिकारिक अभिलेखों और राजपत्रों में संशोधन आवश्यक होगा। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
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Kerala to Keralam Name Change के पीछे भाषाई और सांस्कृतिक आधार
Kerala to Keralam Name Change का मुख्य आधार सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है।
मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है। अंग्रेजी और आधिकारिक दस्तावेजों में ‘Kerala’ नाम का उपयोग होता रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा के अनुरूप नाम होना चाहिए।
पिनराई विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने तर्क दिया कि:
- 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्य गठन के समय भी ‘केरलम’ नाम का प्रयोग हुआ।
- स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को आधिकारिक मान्यता मिलनी चाहिए।
- अन्य राज्यों की तरह भाषाई उच्चारण को प्राथमिकता दी जाए।
Kerala to Keralam Name Change इस दृष्टि से एक प्रतीकात्मक निर्णय माना जा रहा है, जो राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता को दर्शाता है।
राजनीतिक संदर्भ और चुनावी प्रभाव
Kerala to Keralam Name Change प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव (अप्रैल–मई 2026) की तैयारी चल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- यह कदम सांस्कृतिक सम्मान का संदेश देता है
- स्थानीय मतदाताओं में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है
- विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देख रहे हैं
हालांकि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने इसे सांस्कृतिक और प्रशासनिक सुधार के रूप में प्रस्तुत किया है, न कि राजनीतिक कदम के रूप में।
Kerala to Keralam Name Change के निर्णय को व्यापक राजनीतिक विमर्श में भी देखा जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं।
प्रशासनिक और व्यावहारिक प्रभाव
Kerala to Keralam Name Change लागू होने के बाद कई प्रशासनिक बदलाव होंगे:
- सरकारी वेबसाइट और पोर्टल अपडेट
- आधिकारिक लेटरहेड और दस्तावेज संशोधन
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नाम परिवर्तन सूचना
- पासपोर्ट, मानचित्र और सरकारी रिकॉर्ड अपडेट
यह प्रक्रिया समयबद्ध और चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि नाम परिवर्तन का प्रभाव केवल प्रतीकात्मक नहीं होता, बल्कि प्रशासनिक संरचना पर भी पड़ता है। हालांकि यह बदलाव आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर त्वरित प्रभाव नहीं डालेगा, लेकिन दीर्घकाल में राज्य की पहचान को नई आधिकारिक मान्यता मिलेगी।









