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SC ने कसा शिकंजा: मैनुअल स्कैवेंजिंग के मामलों में लापरवाही पर जताई नाराजगी 2025

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SC ने कसा शिकंजा: सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग से हुई मौतों पर नाराजगी जताई, दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद के अधिकारियों से जवाब मांगा हाल

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SC ने कसा शिकंजा: सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग से हुई मौतों पर नाराजगी जताई, दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद के अधिकारियों से जवाब मांगा

SC ने कसा शिकंजा: मैनुअल स्कैवेंजिंग के मामलों में लापरवाही पर जताई नाराजगी 2025

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता, दिल्ली और हैदराबाद के अधिकारियों द्वारा दायर हलफनामों पर असंतोष व्यक्त किया, जिसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनके शहरों में मैनुअल स्कैवेंजिंग और मैनुअल सीवर सफाई कैसे और कब बंद होगी। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अधिकारियों ने दावा किया है कि उनके संबंधित शहरों में यह प्रथा समाप्त हो चुकी है, फिर भी मौतों की घटनाएं सामने आ रही हैं।

SC ने कसा शिकंजा: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ ने भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग के उन्मूलन की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए छह महानगरीय शहरों – दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद में मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश पारित किए। अदालत ने इन शहरों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को हलफनामा दायर करने के लिए कहा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि मैनुअल स्कैवेंजिंग कब और कैसे समाप्त हुई।

इसके अलावा, न्यायालय ने निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों या ठेकेदारों ने मैनुअल स्कैवेंजिंग का कार्य जारी रखा और जिसके कारण मौतें हुईं, उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

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दिल्ली-कोलकाता और हैदराबाद को मिली फटकार

कोर्ट ने पाया कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB), कोलकाता नगर निगम (KMC) और हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर एंड सीवरेज बोर्ड (HMWSSB) द्वारा दायर हलफनामे असंतोषजनक थे। इसमें न तो स्पष्ट किया गया था कि मैनुअल स्कैवेंजिंग को पूरी तरह कब और कैसे बंद किया गया, और न ही यह बताया गया कि इसके बावजूद मौतें कैसे हुईं।

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कोलकाता में तीन मौतें

केएमसी ने दावा किया कि उनके अधिकार क्षेत्र में मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह बंद हो चुकी है। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि 2 फरवरी को इस कारण तीन मौतें हुईं। यह देखते हुए कि हलफनामा वास्तविकता से परे है, न्यायालय ने केएमसी के नगर आयुक्त धवल जैन को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया।

केएमसी के वकील कुणाल चटर्जी ने तर्क दिया कि ये मौतें कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (KMDA) के अधिकार क्षेत्र में हुई थीं। जबकि, KMDA के वकील नंदिनी सेन मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति को मैनुअल स्कैवेंजिंग का कार्य करने का आदेश नहीं दिया है। इस विवाद के मद्देनजर न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस स्थिति को स्पष्ट करें और हलफनामा दाखिल करें कि कोलकाता तथा KMDA के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में मैनुअल स्कैवेंजिंग किसके अधिकार क्षेत्र में आती है।

दिल्ली में सात मौतें

दिल्ली जल बोर्ड के हलफनामे में कहा गया कि दिल्ली में मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि पिछले वर्ष दिल्ली में सात मौतें हुईं। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में वास्तविक सवाल को टालने का प्रयास किया गया है। इस पर कोर्ट ने DJB के निदेशक (S&DM) पंकज कुमार अत्रे को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का आदेश दिया।

हैदराबाद में तीन मौतें

हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर एंड सीवरेज बोर्ड ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उनके हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि मैनुअल स्कैवेंजिंग और मैनुअल सीवर सफाई कब और कैसे बंद की गई, और न ही यह बताया गया कि पिछले एक वर्ष में इसके कारण तीन मौतें क्यों हुई हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के प्रबंध निदेशक के अशोक रेड्डी को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

मुंबई और चेन्नई के हलफनामे स्वीकार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मुंबई और चेन्नई द्वारा दायर हलफनामे संतोषजनक थे। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें निर्देश दिया कि वे विस्तृत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें यह बताया जाए कि हाथ से मैला उठाने और सीवर की सफाई के लिए कौन-कौन से मशीन और उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें यह भी स्पष्ट करना होगा कि इस प्रथा को कब से पूरी तरह बंद किया गया।

बेंगलुरु ने हलफनामा दाखिल नहीं किया

बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने BBMP के आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

कोर्ट की सख्त चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अधिकारी मैनुअल स्कैवेंजिंग को रोकने में विफल रहते हैं और इसके कारण मौतें होती हैं, तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय ने कहा कि यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय गरिमा के खिलाफ भी है।

अगली सुनवाई 20 मार्च को

इस मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित अधिकारी विस्तृत हलफनामा दाखिल करें और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करें।

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मैनुअल स्कैवेंजिंग पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

यह मामला भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख उन अधिकारियों और एजेंसियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है, जो अब भी इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने में लापरवाही बरत रहे हैं।

केस टाइटल: डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ एवं अन्य, |W.P.(C) नंबर 324/2020

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