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SUPREME COURT: सीसीआई की याचिका पर अमेज़न और फ्लिपकार्ट के मामलों को कर्नाटक उच्च न्यायालय में भेजा

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SUPREME COURT: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनियों अमेज़न और

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SUPREME COURT: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनियों अमेज़न और फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार का आरोप लगाने वाले सभी मामलों को कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

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यह आदेश विशेष रूप से उन 26 याचिकाओं के संदर्भ में पारित किया गया है जो विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं, जिनमें आरोप है कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने मोबाइल फोन की बिक्री और खरीद के मामले में प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन किया है।

SUPREME COURT: कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित होने वाली याचिकाएं

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ द्वारा की जा रही थी। न्यायमूर्ति ओका ने कहा, “इस स्थानांतरण याचिका के विषय में शामिल मुद्दे को मूल रूप से रिट याचिका संख्या 26627/2024 में शामिल मुद्दे के रूप में देखा जाता है, जिस पर वर्तमान में कर्नाटक उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश द्वारा सुनवाई की जा रही है।

इसलिए, यह उचित होगा कि इस स्थानांतरण याचिका के विषय में सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए।”

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें अमेज़न और फ्लिपकार्ट से संबंधित 24 रिट याचिकाओं को कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। इसके अलावा, यह याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध भी करती थी ताकि निर्णय में तेजी लाई जा सके और इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार के विरोधाभासी फैसलों से बचा जा सके।

यह 24 याचिकाएं विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित थीं, जिनमें दिल्ली, पंजाब और हरियाणा, कर्नाटक, और इलाहाबाद के उच्च न्यायालय शामिल थे। इन याचिकाओं का संबंध दिल्ली व्यापार संघ द्वारा दायर एक सूचना से था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने प्रतिस्पर्धा कानून, 2002 का उल्लंघन करते हुए मोबाइल फोन की बिक्री और खरीद में विशेष व्यवस्था, भारी छूट और तरजीही लिस्टिंग में भाग लिया।

SUPREME COURT: CCI की ओर से पेश हुए वकील

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2024 को यह स्पष्ट किया था कि इन मामलों को कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को यह निर्देश दिया था कि वह 6 जनवरी 2025 तक CCI के खिलाफ अमेज़न की याचिकाओं पर सुनवाई न करे।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान, CCI की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमान पेश हुए। इन दोनों ने अदालत को सूचित किया कि एंटी-ट्रस्ट नियामक को कर्नाटक उच्च न्यायालय में मामलों को स्थानांतरित करने पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बावजूद, कुछ मुद्दों पर विचार करते हुए, अदालत ने याचिकाओं को स्थानांतरित करने का आदेश पारित करने से पहले यह सुनिश्चित किया कि सभी पक्षों को सुन लिया गया हो।

यह मामला इसलिए भी जटिल बन गया था क्योंकि कुछ पक्षों को प्रतिवादी के रूप में शामिल नहीं किया गया था। इसके अलावा, यह भी बताया गया था कि इसी मुद्दे से संबंधित दो और याचिकाएं उच्च न्यायालय में दायर की गई हैं, जिससे रिट याचिकाओं की संख्या 26 हो गई है।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं को स्थानांतरित करने का आदेश सभी पक्षों को सुनने के बाद ही पारित किया जा सकता है। इस कारण से इसने मामले को 6 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया।

SUPREME COURT: प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन

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आरोप यह है कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का उल्लंघन करते हुए अपने मंच पर मोबाइल फोन की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था, भारी छूट और तरजीही लिस्टिंग की पेशकश की थी।

यह आरोप है कि इन कंपनियों ने छोटे खुदरा विक्रेताओं को नुकसान पहुँचाया और अपने प्लेटफार्म पर प्रतिस्पर्धा को अवरुद्ध किया। इसके परिणामस्वरूप, इन याचिकाओं को विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर किया गया था, जो अब कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित हो गए हैं।

कर्नाटक उच्च न्यायालय अब इन याचिकाओं की सुनवाई करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि इस मामले में कोई प्रतिवादी पक्षों के अधिकारों का उल्लंघन न हो। कोर्ट को यह भी देखना होगा कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को सही तरीके से पालन किया जाए और कोई विरोधाभासी निर्णय न आए। कर्नाटक उच्च न्यायालय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह इन याचिकाओं को सुनकर उचित आदेश जारी करे।

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय को यह मामला सौंपने का निर्णय न केवल कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी बताता है कि भारत में प्रतिस्पर्धा कानूनों के उल्लंघन के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय का निर्णय इस मुद्दे की कानूनी दिशा को तय करेगा, और इस मामले में उचित न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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