TB X-Ray Camp के 5 Free TB Checkup से होने वाले Powerful फायदे

Untitled 200 x 50 px
TB X-Ray Camp के 5 Free TB Checkup hindi.jpg

Table of Contents

TB X-Ray Camp के 5 Powerful फायदे, कामयाब रहा वजीरपुर में मुफ्त जांच अभियान TB Screening Camp वजीरपुर में आयोजित, जहां सैकड़ों लोगों की मुफ्त जांच और एक्स-रे हुआ। जानिए कैसे यह अभियान बेघर और गरीबों के लिए बना राहत की उम्मीद।

TB X-Ray Camp: वजीरपुर में मुफ्त जांच और जागरूकता अभियान से जुटी सैकड़ों की भीड़

रिपोर्ट: मोहम्मद रफ़ी, विशेष संवाददाता

दिल्ली के औद्योगिक और घनी आबादी वाले क्षेत्र वजीरपुर में बुधवार को आयोजित TB X-Ray Camp ने स्थानीय निवासियों, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों और दिहाड़ी मजदूरों के बीच विशेष चर्चा पैदा कर दी। सुबह 9 बजे से शुरू हुआ यह स्वास्थ्य शिविर शाम 5 बजे तक चला, जिसमें सैकड़ों लोगों ने तपेदिक (टीबी) की मुफ्त जांच करवाई।

शिविर का आयोजन देश कि बड़ी सामाजिक संस्था हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन और वीर अब्दुल हमीद युवा क्लब के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनरों पर “Mass TB Screening & X-Ray Camp” स्पष्ट रूप से अंकित था। आयोजन स्थल वजीरपुर मे स्थित सामुदायिक अंबेडकर भवन में रखा गया, जिसकी देखरेख इलाके के सम्मानीय व्यक्ति अरविन्द कुमार गौतम करते है।

टीबी आज भी भारत सहित दुनिया भर में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर पहचान और नियमित उपचार से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है, लेकिन जागरूकता की कमी और जांच में देरी इसे खतरनाक बना देती है।

TB X Ray Camp के 5 Free TB Checkup.hindi.jpg
TB X Ray Camp के 5 Free TB Checkup.hindi.jpg

TB X-Ray Camp में सुबह से उमड़ी भीड़

TB X-Ray Camp की शुरुआत सुबह निर्धारित समय पर हुई। रजिस्ट्रेशन डेस्क पर स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों का नाम, उम्र और लक्षण दर्ज किए। हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन कि मौके पर मौजूद टीम ने बताया कि शिविर में प्राथमिक जांच, एक्स-रे सुविधा और संदिग्ध मरीजों के लिए आगे की जांच की व्यवस्था की गई थी।

स्थल पर पहुंचते ही साफ दिख रहा था कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय पहल है। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और यहां तक कि किशोर भी जांच के लिए आए थे। कई लोग ऐसे थे जिन्हें पिछले कई सप्ताह से लगातार खांसी, बुखार या वजन घटने की शिकायत थी, लेकिन उन्होंने कभी जांच नहीं करवाई थी।

हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन की स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहना टीबी का प्रमुख लक्षण हो सकता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता देते हुए एक्स-रे और बलगम का सैंपल कलेक्शन किया गया।

TB X Ray Camp के 5 Free TB Checku.jpg
TB X Ray Camp के 5 Free TB Checku.jpg

TB X-Ray Camp के दौरान जागरूकता पर विशेष जोर

TB X-Ray Camp केवल जांच तक सीमित नहीं था। आयोजकों ने नुक्कड़ नाटक और संवाद कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जागरूक भी किया। एक कलाकार ने टीबी का प्रतीकात्मक मास्क पहनकर लोगों को समझाया कि बीमारी से डरने के बजाय समय पर जांच और इलाज जरूरी है।

स्थानीय भाषा में समझाए गए संदेशों ने लोगों को प्रभावित किया। कई लोगों ने पहली बार जाना कि टीबी छूने से नहीं बल्कि संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से फैलती है। डॉक्टरों ने बताया कि मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसलिए अधूरा इलाज या दवा बीच में छोड़ना खतरनाक साबित हो सकता है।

यह भी पढ़ें

DR. SAIYYADA ASHARFI RAHMAN: 3 कोशिश में वजीरपुर की बेटी ने रचा इतिहास, संघर्ष से सफलता तक का भावुक सफर

Neha Singh Viral Pic: LinkedIn पोस्ट और Robot विवाद से चर्चा

TB Screening Camp में नुक्कड़ नाटक से जागरूकता की अनोखी पहल

वजीरपुर में आयोजित TB X-Ray Camp के दौरान केवल जांच और एक्स-रे तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को तपेदिक (टीबी) के प्रति जागरूक करने के लिए एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। जिसका उद्देश्य आम लोगों तक सरल भाषा में यह संदेश पहुंचाना था कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है।

कार्यक्रम स्थल के बाहर खुले स्थान पर जैसे ही नुक्कड़ नाटक की शुरुआत हुई, आसपास मौजूद लोग धीरे-धीरे वहां एकत्रित होने लगे। कलाकारों ने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े पात्रों के माध्यम से यह दिखाया कि कैसे लोग लंबे समय तक खांसी, बुखार या कमजोरी को नजरअंदाज कर देते हैं और समय पर जांच नहीं करवाते। नाटक के मुख्य पात्र को लगातार खांसी रहती है, लेकिन वह इसे सामान्य सर्दी समझकर दवा लेने से बचता रहता है। बाद में जब स्थिति बिगड़ती है, तब डॉक्टर उसे जांच करवाने की सलाह देते हैं और पता चलता है कि उसे टीबी है।

नाटक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था कि “दो हफ्ते से अधिक खांसी को हल्के में न लें”। कलाकारों ने संवादों के माध्यम से समझाया कि TB X-Ray Camp जैसे शिविरों में मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध है और डर या शर्म के कारण बीमारी छिपाना खतरनाक हो सकता है।

एक कलाकार ने प्रतीकात्मक रूप से टीबी का मास्क पहनकर दर्शकों के बीच घूमते हुए यह दर्शाया कि बीमारी छिपाने से वह और फैलती है। इस दृश्य ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और कई लोग नाटक के बाद सीधे रजिस्ट्रेशन डेस्क पर पहुंचकर जांच के लिए नाम दर्ज कराने लगे।

नुक्कड़ नाटक में यह भी दिखाया गया कि अधूरा इलाज टीबी को और जटिल बना सकता है, जिससे मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। कलाकारों ने जोर देकर कहा कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को पूरा कोर्स खत्म होने तक लेना जरूरी है। स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने नाटक को गंभीरता से देखा और कई जगहों पर तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कुछ युवाओं ने अपने मोबाइल फोन पर वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा भी किया, जिससे संदेश और व्यापक स्तर पर पहुंचा।

नाटक के अंत में सभी कलाकारों ने मिलकर एक स्वर में कहा, “टीबी हारेगा, देश जीतेगा।” यह नारा सुनते ही भीड़ में मौजूद लोगों ने भी दोहराया। आयोजकों का मानना था कि केवल चिकित्सीय जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यम से जटिल स्वास्थ्य संदेशों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।

इस पहल ने स्पष्ट किया कि TB X-Ray Camp का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी है।

TB X-Ray Camp के 5 Free TB Checkup.jpg
TB X Ray Camp के 5 Free TB Checkup.jpg

शिविर का संचालन और व्यवस्थाएं

शिविर स्थल पर तीन अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे:

  1. रजिस्ट्रेशन और प्राथमिक जांच
  2. एक्स-रे और डायग्नोस्टिक परीक्षण
  3. परामर्श और दवा संबंधी जानकारी

मौके पर मौजूद हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन के एक स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि शिविर में आने वाले हर व्यक्ति को गोपनीयता के साथ जांच सुविधा दी गई। रजिस्ट्रेशन डेस्क पर बैठी एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता मरीजों का विवरण दर्ज कर रही थीं। उन्होंने बताया कि कई लोग अपनी बीमारी छिपाते हैं क्योंकि समाज में टीबी को लेकर अभी भी कलंक की भावना है। ऐसे शिविरों से यह मानसिकता बदलने में मदद मिलती है।

बेघर और कमजोर वर्ग पर विशेष फोकस रहा हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन का

आयोजकों के अनुसार, वजीरपुर और आसपास की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग संक्रमण के अधिक जोखिम में हैं। भीड़भाड़, पोषण की कमी और अस्थायी निवास परिस्थितियां टीबी के प्रसार को बढ़ाती हैं।

एक बुजुर्ग व्यक्ति, जो लाठी के सहारे शिविर में पहुंचे, ने बताया कि उन्हें कई महीनों से खांसी थी लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण अस्पताल नहीं जा सके। शिविर में उन्हें मुफ्त जांच की सुविधा मिली। स्थानीय निवासियों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए ताकि लोगों को बार-बार अस्पताल न भागना पड़े।

विशेषज्ञों की राय

मौके पर मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते मरीज नियमित दवाइयां लें और बीच में उपचार न छोड़ें। डॉक्टरों ने कहा कि टीबी के लक्षणों में लगातार खांसी, बलगम में खून आना, रात में पसीना, बुखार और वजन घटना शामिल हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य टीम ने यह भी बताया कि मधुमेह और एचआईवी से ग्रसित मरीजों में टीबी का खतरा अधिक होता है।

शिविर में सामने आए तथ्य

  • बड़ी संख्या में लोगों ने पहली बार एक्स-रे करवाया
  • कई संदिग्ध मामलों को आगे की जांच के लिए चिन्हित किया गया
  • महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही
  • जागरूकता कार्यक्रम के दौरान युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखी गई

स्थानीय समुदाय के नेताओं ने भी कार्यक्रम में सहयोग दिया और लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया। इस जांच केंप मे इलाके के पूर्व पार्षद ओर विपक्ष के नेता विकास गोयल भी मौजूद रहे । विकास गोयल कि मौजूदगी ने जनता को कैम्प का पूरा फायदे लेने के लिए जागरूकता का काम किया ओर इस केंप मे वो भी काफी देर तक मोजूद रहे । विकास गोयल ने हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ओर वीर अब्दुल हमीद युवा क्लब का भी धन्यवाद किया

इलाके के प्रधान व प्रमुख समाज सेवी अरविन्द कुमार गौतम ने केंप को लगाने ओर कामयाब करने के लिए भवन कि साफ सफाई , बिजली आदि व्यवस्था का इंतेजाम कराने मे एक बहुत बड़ी भूमिका अदा की। ओर साथ ही हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया ऑर्गनाइजेशन का भी धन्यवाद किया

इस शिविर का एक महत्वपूर्ण पहलू मानवीय दृष्टिकोण था। आयोजकों ने किसी भी व्यक्ति से शुल्क नहीं लिया। कई लोग जो सामान्यतः सरकारी अस्पताल जाने से कतराते हैं, वे यहां सहजता से पहुंचे। एक महिला प्रतिभागी ने कहा कि “हम लोग अक्सर बीमारी को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि रोज़ी-रोटी की चिंता रहती है। यहां जांच कराना आसान लगा।”

रिपोर्टर का ग्राउंड अनुभव

संवाददाता के अनुसार TB X-Ray Camp सुबह शिविर स्थल पर वातावरण सामान्य लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ा, भीड़ भी बढ़ती गई। कुछ लोग हिचकिचाते हुए आए, तो कुछ अपने परिवार के साथ पहुंचे।

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान लोगों की आंखों में जिज्ञासा साफ दिख रही थी। डॉक्टरों और स्वयंसेवकों की टीम लगातार समझा रही थी कि टीबी का इलाज मुफ्त है और सरकारी कार्यक्रमों के तहत दवाएं भी अस्पताल मे मुफ़्त उपलब्ध हैं। कई युवाओं ने मोबाइल फोन से जानकारी रिकॉर्ड की और सोशल मीडिया पर साझा की। इससे संदेश तेजी से फैलता नजर आया।

चुनौतियां भी आईं सामने

हालांकि TB X-Ray Camp शिविर सफल रहा, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। शिविर कि शुरुआत से ही मौसम ने ऐसी करवट बदली की रिमझिम रिमझिम बारिश होती रही इसी मौसम के बीच नुक्कड़ नाटक भी किया गया ओर कैम्प मे आने के लिए प्रचार प्रसार का काम वीर अब्दुल हमीद युवा क्लब की पूरी टीम ने किया इस टीम का नेत्रत्व क्लब के अध्यक्ष रहमत अली ने किया। कुछ लोग सामाजिक बदनामी के डर से खुलकर लक्षण बताने में संकोच कर रहे थे। स्वास्थ्यकर्मियों ने व्यक्तिगत बातचीत के जरिए भरोसा दिलाया कि मरीज की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

क्यों जरूरी है TB X-Ray Camp?

टीबी आज भी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। कोविड-19 के बाद यह दूसरी सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारी मानी जाती है। भारत में हर साल लाखों लोग टीबी से प्रभावित होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार: TB X-Ray Camp

  • मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) एक बड़ी चुनौती है
  • टीबी और एचआईवी/डायबिटीज जैसी बीमारियों का साथ होना खतरा बढ़ाता है
  • झुग्गी और बेघर आबादी में संक्रमण दर 1400–1700 प्रति लाख तक आंकी गई है

ऐसे में TB X-Ray Camp जैसे अभियान बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं

वजीरपुर में क्या रहा खास?

इस TB X-Ray Camp में:

✔ मुफ्त एक्स-रे सुविधा
✔ ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन
✔ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम
✔ जागरूकता नाटक और जनसंवाद
✔ संदिग्ध मरीजों का तत्काल सैंपल कलेक्शन

TB X-Ray Camp शिविर में स्वास्थ्य टीम ने घर-घर जाकर लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया। जागरूकता बढ़ाने के लिए नुक्कड़ नाटक और जनजागरण अभियान भी चलाया गया।

बेघर और कमजोर वर्ग पर विशेष फोकस

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बेघर और दिहाड़ी मजदूर वर्ग टीबी के सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। खराब पोषण, भीड़भाड़ और स्वच्छता की कमी बीमारी को बढ़ाती है। TB X-Ray Camp के दौरान इन वर्गों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की गई। कई लोगों को शुरुआती लक्षणों के बावजूद बीमारी की जानकारी नहीं थी।

जन जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

इस TB X-Ray Camp का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि टीबी छूने से नहीं फैलती, बल्कि संक्रमित व्यक्ति की खांसी से फैलती है। सही इलाज और दवाइयों के नियमित सेवन से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। सरकार द्वारा “टीबी मुक्त भारत” का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे सामुदायिक शिविर इस मिशन को मजबूती दे रहे हैं।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

शिविर में पहुंचे कई लोगों ने बताया कि उन्हें पहली बार मुफ्त एक्स-रे और जांच की सुविधा मिली है। एक स्थानीय निवासी ने कहा:

“अगर ये कैंप न लगता तो हम कभी जांच नहीं कराते। अब हमें बीमारी का डर नहीं, बल्कि इलाज की उम्मीद है।”

यह अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का प्रतीक भी बन गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक जांच और इलाज नहीं पहुंचेगा, तब तक टीबी पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं है।

भविष्य मे भी इस तरह के शिविर कि जरूरत नजर आई

वजीरपुर में आयोजित यह TB X-Ray Camp केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं बल्कि सामुदायिक जागरूकता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। सैकड़ों लोगों की जांच, विशेषज्ञों की मौजूदगी और जागरूकता गतिविधियों ने स्पष्ट किया कि टीबी जैसी बीमारी से लड़ाई केवल दवाओं से नहीं बल्कि जानकारी और सामूहिक प्रयास से भी जीती जा सकती है।

Facebook
WhatsApp
Twitter
Threads
Telegram

Leave a comment