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NBCC को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर लगाई रोक 2025 !

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NBCC को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 फरवरी) को नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (इंडिया) लिमिटेड (NBCC) को सुपरटेक लिमिटेड की रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने की अनुमति देने वाले नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेश पर रोक लगा दी।

NBCC को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश पर लगाई रोक 2025 !

इसके साथ ही कोर्ट ने हितधारकों को परियोजनाओं को पूरा करने के लिए वैकल्पिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

NBCC को राहत नहीं, कोर्ट की सुनवाई और रोक का फैसला

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ NCLAT के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस आदेश में सुपरटेक लिमिटेड की 16 अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के NBCC (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।

NBCC ने सुपरटेक लिमिटेड की परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने के लिए आवेदन दायर किया था। सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा लंबित दिवालियापन कार्यवाही चल रही है। यह कंपनी नोएडा, ग्रेटर नोएडा और देश के अन्य शहरों में विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के निर्माण में लगी हुई है।

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घर खरीदारों की स्थिति

लगभग 50,000 से अधिक घर खरीदार अपने घरों के कब्जे का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से कई खरीदारों को देरी के कारण गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए कहा कि विचारणीय प्राथमिक मुद्दा यह है कि क्या NCLAT ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परियोजनाओं को NBCC को सौंपा था।

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हितधारकों के लिए कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कॉरपोरेट गारंटर, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) और कॉरपोरेट देनदार के प्रमोटर आरके अरोड़ा जैसे सभी हितधारकों को 21 मार्च तक कोई वैकल्पिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

कॉरपोरेट गारंटर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और ध्रुव मेहता ने मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि NCLAT ने अन्य हितधारकों को अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए उचित अवसर प्रदान नहीं किया।

सुरक्षित लेनदारों की आपत्तियां

सुरक्षित लेनदारों ने यह भी प्रस्तुत किया कि NBCC की योजना में बकाया चुकाने के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है। YEIDA के वकीलों ने तर्क दिया कि NCLAT के निर्देश भूमि स्वामित्व अधिकारियों को लंबित बकाया राशि के पुनर्भुगतान के मुद्दे पर चुप थे।

NCLAT का आदेश और उसके निर्देश

NCLAT के 12 दिसंबर के आदेश में जस्टिस अशोक भूषण (अध्यक्ष) और बरुन मित्रा (तकनीकी सदस्य) की पीठ ने कहा कि NBCC को रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (RERA) सहित वैधानिक आवश्यकताओं का अनुपालन करने से छूट नहीं दी जा सकती।

NCLAT ने बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम भारत संघ के मामले में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत राज्य और उसके पदाधिकारियों को प्रभावी प्रबंधन के लिए सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए कहता है।

गृह खरीदारों के अधिकार

न्यायाधिकरण ने पाया कि जिन गृह खरीदारों ने विभिन्न परियोजनाओं में इकाइयों के लिए पर्याप्त भुगतान किया है, वे बिल्डर खरीदार समझौते के अनुसार केवल अवैतनिक बकाया राशि वसूलने के हकदार हैं। इसने स्पष्ट किया कि बकाया राशि को छोड़कर, पूरा होने के लिए गृह खरीदारों पर कोई अतिरिक्त लागत नहीं लगाई जाएगी।

परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन की व्यवस्था

न्यायाधिकरण ने कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बिना बिकी हुई इन्वेंट्री, घर खरीदने वालों से प्राप्तियां और NBCC से मिलने वाली फंडिंग से धन जुटाया जाना चाहिए।

न्यायाधिकरण के प्रमुख निर्देश:

  1. अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं: घर खरीदने वाले अपने बिल्डर खरीदार समझौतों से परे कोई अतिरिक्त लागत वहन नहीं करेंगे।
  2. निर्माण की गुणवत्ता: गुणवत्तापूर्ण निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी और प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा तीसरे पक्ष के ऑडिट किए जाएंगे।
  3. निर्धारित समयसीमा: परियोजनाओं को 12 से 36 महीनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
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मामले की अगली सुनवाई और संभावित प्रभाव

अब यह देखना होगा कि 21 मार्च तक विभिन्न हितधारक अपने वैकल्पिक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से हजारों घर खरीदारों को राहत मिल सकती है, क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए संतुलित और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए।

केस टाइटल: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाम एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड और अन्य।

सी.ए. नंबर 2240/2025 और संबंधित मामले।

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