KERALA HC

दैनिक खर्चों के लिए दी गई ग्रांट सेवाओं या वस्तुओं की आपूर्ति के बदले में नहीं

केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि किसी संस्था को उसके दैनिक खर्चों के लिए दी गई ग्रांट को 

यह निर्णय केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) और उत्पाद शुल्क विभाग के आदेश के खिलाफ दायर रिट याचिका पर दिया गया। 

इस आदेश में विभाग ने याचिकाकर्ता पर जीएसटी और जुर्माने की भारी भरकम राशि लगाई थी 

जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। 

यह मामला केरल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी फॉर एजुकेशन (KITE) नामक संस्था से संबंधित है। 

इस संस्था का गठन केरल सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में आईटी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया गया था 

इसका मुख्य कार्य स्कूलों के लिए आवश्यक हार्डवेयर की खरीद करना और उन्हें शिक्षा विभाग के निर्देशों के आधार पर वितरित करना है। 

इस प्रक्रिया में आवश्यक धनराशि केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) द्वारा प्रदान की जाती है, जो एक सरकारी संस्था है। 

हालांकि, केंद्रीय जीएसटी विभाग ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने वस्तुओं और सेवाओं की समग्र आपूर्ति की है, और इस पर जीएसटी देय है।