Missing Persons Delhi: दिल्ली में जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में 800+ लोग लापता हुए। हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा। जानिए पूरी खबर।
Missing Persons Delhi: दिल्ली में गुमशुदा मामलों में बढ़ोतरी पर हाईकोर्ट सख्त
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई एक जनहित याचिका के आधार पर की गई है, जिसे एनजीओ ‘फ्रीडम रिक्लेम्ड’ ने दायर किया है।
15 दिनों में 800 से अधिक लोग लापता
याचिका में दावा किया गया है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही दिल्ली में 800 से अधिक लोग लापता हुए हैं। यह आंकड़ा राजधानी में गुमशुदा मामलों की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
2016 से अब तक 52,326 लोग अब भी लापता
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 15 जनवरी 2026 तक 2,32,737 लोग लापता हुए हैं, जिनमें से 52,326 अब भी नहीं मिले हैं। इनमें 6,931 बच्चे भी शामिल हैं।
“मिलने का अधिकार” को जीवन के अधिकार से जोड़ा गया
याचिका में “मिलने का अधिकार” को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि गुमशुदा मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रियाएं और रोकथाम तंत्र विफल हो रहे हैं, जिससे मानव तस्करी जैसे संगठित अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है।
अदालत की प्रतिक्रिया
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्या इसी विषय पर कोई मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिका में मांगी गई राहत
- गुमशुदा मामलों में “गोल्डन ऑवर” के दौरान त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना।
- ज़ीरो एफआईआर की अनिवार्य पंजीकरण और डिजिटल ट्रैकिंग अलर्ट्स की शुरुआत।
- सरकारी अस्पतालों और शवगृहों में अज्ञात मरीजों और शवों के रिकॉर्ड की नियमित जांच के लिए उच्च स्तरीय समन्वय समिति का गठन।
यह मामला केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की पीड़ा का है जो अपने प्रियजनों की तलाश में हैं। उम्मीद है कि अदालत की यह पहल गुमशुदा लोगों की तलाश और उनके परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
दिल्ली में गुमशुदगी के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, “दिल्ली की मुख्यमंत्री जवाब दो?” की उठी मांग
राजधानी दिल्ली में गुमशुदा लोगों के ताज़ा आंकड़ों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 3,282 लोग लापता दर्ज किए गए हैं। इनमें से 682 लोगों को ट्रेस कर लिया गया है, जबकि 2,558 लोग अब भी लापता (Untraced) हैं।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के बीच चिंता बढ़ गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है—“दिल्ली की मुख्यमंत्री जवाब दो?”—आखिर राजधानी में इतनी बड़ी संख्या में लोग गायब कैसे हो रहे हैं और उन्हें खोजने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
Missing Persons Delhi डेढ़ महीने में हजारों लोग गायब
आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्थिति सामान्य नहीं कही जा सकती। साल की शुरुआत के सिर्फ 42 दिनों में तीन हजार से अधिक लोगों के लापता होने का मतलब है कि औसतन रोज़ाना दर्जनों लोग गायब हो रहे हैं।
Missing Persons Delhi विशेषज्ञों का मानना है कि गुमशुदगी के मामलों में देरी से कार्रवाई, जागरूकता की कमी और कई बार परिवारों द्वारा तुरंत रिपोर्ट दर्ज न कराने जैसी वजहें भी चुनौती को बढ़ाती हैं। हालांकि, इतने बड़े अंतर—लापता और ट्रेस किए गए लोगों के बीच—ने कानून-व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।
Missing Persons Delhi ट्रेस और अनट्रेस के बीच बड़ा अंतर
दिल्ली पुलिस के डेटा में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि कुल मामलों में से बड़ी संख्या अभी तक अनट्रेस है।
- Missing Person: 3,282
- Traced Person: 682
- Untraced Person: 2,558
यह अंतर बताता है कि खोज अभियान को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। परिवारों के लिए यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि अनिश्चितता और इंतजार की लंबी पीड़ा है।
“जवाब दो” की राजनीति और जनचिंता Missing Persons Delhi
जैसे-जैसे आंकड़े सार्वजनिक हो रहे हैं, राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है। “दिल्ली की मुख्यमंत्री जवाब दो?” जैसे नारे प्रशासनिक जवाबदेही की मांग को दर्शाते हैं।
नागरिकों का कहना है Missing Persons Delhi कि राजधानी होने के नाते दिल्ली में पुलिसिंग, तकनीक और निगरानी तंत्र देश के कई हिस्सों से बेहतर होना चाहिए। ऐसे में यदि गुमशुदगी के मामले लगातार बढ़ते दिखें, तो यह स्वाभाविक रूप से सरकार से जवाब मांगने की स्थिति पैदा करता है।
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Missing Persons Delhi सिर्फ दिल्ली नहीं, 8 राज्यों का डेटा भी चिंताजनक
दिल्ली के साथ-साथ देश के आठ राज्यों—चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—के संयुक्त आंकड़े भी सामने आए हैं।
इन राज्यों में कुल मिलाकर:
- Traced Person: 796
- Untraced Person: 3,067
यानी यहां भी ट्रेस किए गए लोगों की तुलना में लापता लोगों की संख्या कहीं ज्यादा है। यह संकेत देता है कि गुमशुदगी सिर्फ किसी एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बनती जा रही है।
बच्चों और महिलाओं के मामलों पर रहती है विशेष नजर
हालांकि Missing Persons Delhi इस डेटा में श्रेणीवार विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन आमतौर पर गुमशुदा मामलों में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा माना जाता है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई को बेहद महत्वपूर्ण समझा जाता है, क्योंकि शुरुआती घंटे ही खोज अभियान की दिशा तय करते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञ अक्सर “गोल्डन ऑवर” की बात करते हैं—यानी वह शुरुआती समय जब सही कदम उठाने से व्यक्ति को जल्दी ढूंढा जा सकता है।
तकनीक और निगरानी की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में पुलिस ने सीसीटीवी नेटवर्क, डिजिटल ट्रैकिंग और डाटाबेस इंटीग्रेशन जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि इन व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की जरूरत हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और रेलवे-बस टर्मिनलों जैसे ट्रांजिट पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाना प्रभावी साबित हो सकता है।
परिवारों के लिए सबसे कठिन इंतजार
Missing Persons Delhi गुमशुदगी का हर मामला सिर्फ एक फाइल नहीं होता—उसके पीछे एक परिवार की बेचैनी, उम्मीद और डर छिपा होता है। कई परिवार महीनों तक अपने प्रियजनों की तलाश में पुलिस थानों और दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि परिवारों को काउंसलिंग, कानूनी सहायता और नियमित अपडेट मिलना भी उतना ही जरूरी है जितना खोज अभियान।
जागरूकता भी है बड़ा हथियार
Missing Persons Delhi पुलिस बार-बार यह अपील करती है कि किसी व्यक्ति के गायब होने पर तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। देरी से केस दर्ज होने पर जांच मुश्किल हो जाती है।
इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर सतर्कता, बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देना—ये सभी कदम गुमशुदगी रोकने में मदद कर सकते हैं।
दिल्ली और अन्य राज्यों के ताज़ा आंकड़े एक स्पष्ट संकेत देते हैं कि गुमशुदा लोगों का मुद्दा गंभीर है और इस पर लगातार निगरानी व कार्रवाई की आवश्यकता है। जैसे-जैसे ये आंकड़े चर्चा में हैं, प्रशासन से पारदर्शिता और तेज़ कार्रवाई की उम्मीद भी उतनी ही बढ़ती जा रही है।
Missing Persons Delhi: दिल्ली में गुमशुदा लोगों की संख्या पर हाईकोर्ट की सख्ती
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई एक जनहित याचिका के आधार पर की गई है, जिसे एनजीओ ‘फ्रीडम रिक्लेम्ड’ ने दायर किया है।
Missing Persons Delhi जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में दिल्ली में 807 लोग लापता हुए, जिनमें 191 नाबालिग शामिल हैं। इनमें से केवल 235 लोगों को अब तक खोजा जा सका है, जबकि 572 लोग अभी भी लापता हैं।
दिल्ली पुलिस ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जनवरी 2026 में कुल 1,777 लोग लापता हुए, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है। पुलिस के अनुसार, 2025 में 24,508 लोग लापता हुए थे, जिनमें से 15,421 को खोजा जा चुका है। पुलिस का कहना है कि गुमशुदा लोगों की संख्या में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है।
एनएचआरसी की प्रतिक्रिया
Missing Persons Delhi राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आंकड़ों की समीक्षा Missing Persons Delhi
- 2016 से 2025 तक: इस अवधि में दिल्ली में 2,32,737 लोग लापता हुए, जिनमें से 52,326 अभी भी नहीं मिले हैं।
- नाबालिगों की स्थिति: 2016 से 2026 के बीच 60,694 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 6,931 अभी भी गायब हैं।
अदालत की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्या इसी विषय पर कोई मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
दिल्ली में 807 लोग लापता: NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, सरकार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली में जनवरी 2026 के पहले दो हफ्तों के दौरान 807 लोगों के लापता होने के मामले को गंभीरता से लिया है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इनमें 191 नाबालिग और 616 वयस्क शामिल हैं। अब तक पुलिस 235 लोगों का पता लगा चुकी है, जबकि 572 लोग अभी भी लापता हैं।
आयोग ने कहा है कि यदि समाचार रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए NHRC ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर मामले पर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
Missing Persons Delhi मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 5 फरवरी 2026 को प्रकाशित आंकड़ों में यह भी सामने आया कि वर्ष 2025 में दिल्ली से कुल 24,508 लोग लापता हुए थे। इनमें लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं थीं। पुलिस ने इनमें से 15,421 लोगों को खोज निकाला, जबकि 9,087 मामले अभी भी अनसुलझे हैं।
डेटा में किशोरों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से हर साल 5,000 से अधिक किशोर लापता हो रहे हैं, जिनमें करीब 3,500 लड़कियां शामिल हैं। यह स्थिति बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।


