SUPREME COURT: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट पोस्ट ग्रेजुएट (CLAT PG) 2025 परीक्षा में प्रक्रियागत खामियों और उम्मीदवारों के साथ अनुचित व्यवहार के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे संबंधित उच्च न्यायालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
याचिकाकर्ता अनम खान और आयुष अग्रवाल ने परीक्षा प्रक्रिया में खामियों, उत्तर कुंजी में त्रुटियों और आपत्ति शुल्क को लेकर याचिका दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट सीधे इस मामले की सुनवाई नहीं करेगा।
SUPREME COURT: अदालत की टिप्पणी
पीठ ने कहा, “हम अनुच्छेद 32 याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। याचिकाकर्ता अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय में जा सकते हैं।”
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने CLAT PG 2025 की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने की याचिकाकर्ताओं की अपील को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने से संतुलन बिगड़ सकता है।
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याचिकाकर्ताओं ने निम्नलिखित मुद्दे उठाए:
- अनुचित प्रक्रिया: विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पुस्तिका देने में देरी की गई।
- उत्तर कुंजी में त्रुटियां: 12 प्रश्नों में गलत उत्तर होने का दावा।
- आपत्ति शुल्क: प्रति आपत्ति ₹1,000 का शुल्क अनुचित बताया।
- काउंसलिंग की समयसीमा: परिणाम और काउंसलिंग के बीच कम समय को लेकर आपत्ति जताई।
अनम खान ने मुंबई के परीक्षा केंद्र पर समय पर प्रश्न पुस्तिका मिलने की बात कही, जबकि आयुष अग्रवाल ने इंदौर में देरी की शिकायत की। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।
SUPREME COURT: सुप्रीम कोर्ट का सुझाव
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं, जहां अलग-अलग राज्यों के उम्मीदवारों के मामलों को एक साथ सुना जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं की उत्तर कुंजी पर दलीलों में त्रुटियां होने का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा, “कुछ प्रश्नों के संबंध में आप गलत हैं।”
याचिकाकर्ताओं ने CLAT PG 2025 के परिणाम और काउंसलिंग प्रक्रिया पर तब तक रोक लगाने की मांग की, जब तक कि उत्तर कुंजी को पूरी तरह से सही न कर दिया जाए।
SUPREME COURT: आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संबंधित उच्च न्यायालय में ले जाने का निर्देश देते हुए याचिका खारिज कर दी। अब याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतें आगे ले जाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना होगा।





