Delhi High Court Street Vendors Relief: दिल्ली हाईकोर्ट ने रेहड़ी-पटरी वालों को बड़ी राहत दी। MCD और NDMC को सामान जब्ती के 24 घंटे में मेमो देने व वीडियोग्राफी के निर्देश।
Delhi High Court Street Vendors Relief: दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, रेहड़ी-पटरी वालों को MCD और NDMC की मनमानी से मिली बड़ी राहत
राजधानी दिल्ली में सड़क किनारे दुकान लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर्स और रेहड़ी-पटरी दुकानदारों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से एक अत्यंत राहतभरी खबर सामने आई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगर निकायों की ओर से सामान ज़ब्त करने और जब्ती के दौरान होने वाली कथित मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) को सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी रेहड़ी-पटरी वाले का सामान ज़ब्त करने से पहले और बाद में प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही तय करना अनिवार्य होगा।
अदालत के इस फैसले से सालों से प्रशासनिक उत्पीड़न, अनिश्चितता और आर्थिक नुकसान का सामना कर रहे छोटे व्यापारियों को नया संबल मिला है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जब्ती की पूरी प्रक्रिया का वीडियोग्राफी साक्ष्य रखना होगा और ज़ब्त किए गए सामान की सूची (जब्ती मेमो) 24 घंटे के भीतर विक्रेता को सौंपनी होगी। इस फैसले का सीधा असर दिल्ली के करीब 5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स पर पड़ेगा। यह आदेश न केवल स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 के प्रावधानों को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि राजधानी में छोटे कारोबारियों की आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। Delhi High Court Street Vendors Relief
Delhi High Court Street Vendors Relief: सामान जब्ती का नया नियम, 24 घंटे में मेमो देना अनिवार्य
Delhi High Court Street Vendors Relief के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्थानीय निकाय अब बिना कोई आधिकारिक रिकॉर्ड बनाए या मनमाने तरीके से किसी भी स्ट्रीट वेंडर का सामान ज़ब्त नहीं कर सकते। अदालत ने आदेश दिया है कि जब भी MCD या NDMC का प्रवर्तन दस्ता (Enforcement Team) किसी इलाके में अतिक्रमण हटाने या सामान ज़ब्त करने की कार्रवाई करेगा, तो उसे तुरंत एक औपचारिक ‘जब्ती मेमो’ (Seizure Memo) तैयार करना होगा। यह मेमो संबंधित रेहड़ी-पटरी वाले को कार्रवाई के अधिकतम 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
इस मेमो में ज़ब्त किए गए सामान का पूरा ब्योरा दर्ज होना चाहिए। इसमें किस स्थान से, किस समय, कितना सामान ज़ब्त किया गया और संबंधित अधिकारी का नाम व पद क्या है, इन सभी विवरणों का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट ने यह फैसला ‘रेहड़ी-पटरी एकता मंच’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जब्ती के दौरान अधिकारियों द्वारा बिना किसी लिखित रसीद के सामान उठा लिया जाता है, जिससे वेंडर्स को अपना ही सामान वापस पाने के लिए नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
अदालत ने माना कि उचित दस्तावेज न होने से भ्रष्टाचार और जवाबदेही के अभाव को बढ़ावा मिलता है। 24 घंटे के भीतर जब्ती मेमो देने की बाध्यता से प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और विक्रेताओं को अपना पक्ष रखने या निर्धारित जुर्माना भरकर समय पर सामान वापस पाने का कानूनी आधार प्राप्त होगा। यह नया नियम वेंडर्स को अधिकारियों की अनधिकृत वसूली और अनुचित जब्ती से बचाने में एक ढाल की तरह काम करेगा। Delhi High Court Street Vendors Relief
Delhi High Court Street Vendors Relief: कार्रवाई की पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का सख्त आदेश
Delhi High Court Street Vendors Relief का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी पहलू है जब्ती की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखना। अदालत ने MCD और NDMC को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब भी प्रवर्तन दस्ता किसी क्षेत्र में रेहड़ी-पटरी हटाने या सामान ज़ब्त करने की कार्रवाई करे, तो उस पूरी प्रक्रिया की निर्बाध वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जानी चाहिए। यह वीडियोग्राफी कार्रवाई शुरू होने से लेकर सामान को सरकारी वाहन में लादे जाने तक की होगी। Delhi High Court Street Vendors Relief
अदालत का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य मौजूद रहने से वेंडर्स और नगर निगम के अधिकारियों के बीच होने वाले विवादों, बहास और आरोपों-प्रत्यारोपों का निपटारा निष्पक्षता से किया जा सकेगा। अक्सर देखने में आता था कि वेंडर्स आरोप लगाते थे कि उनका कीमती सामान, तराजू या नकद राशि ज़ब्त कर ली गई, जबकि रिकॉर्ड में उसका उल्लेख नहीं होता था। वहीं दूसरी तरफ, अधिकारी वेंडर्स पर सरकारी काम में बाधा डालने या हमला करने का आरोप लगाते थे। वीडियोग्राफी अनिवार्य होने से दोनों पक्षों की ओर से झूठे दावों पर लगाम लगेगी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का रिकॉर्ड नगर निगम के संबंधित विभाग के सर्वर या रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखा जाएगा। यदि कोई स्ट्रीट वेंडर कोर्ट या अपीलीय निकाय का दरवाजा खटखटाता है, तो नगर निगम को उस कार्रवाई का डिजिटल साक्ष्य अदालत के सामने पेश करना होगा। डिजिटल पारदर्शिता का यह कदम दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों के अधिकारों की रक्षा करने और कानून के शासन को बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगा। Delhi High Court Street Vendors Relief
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| मुख्य पहलू | नया नियम / हाईकोर्ट का निर्देश |
| जब्ती मेमो (Seizure Memo) | सामान ज़ब्त करने के अधिकतम 24 घंटे के भीतर वेंडर को रसीद देना अनिवार्य। |
| डिजिटल साक्ष्य | जब्ती और अतिक्रमण हटाने की पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी अनिवार्य। |
| कानूनी आधार | स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड) एक्ट 2014 की धारा 19 का सख्त अनुपालन। |
| TVC की भूमिका | टाउन वेंडिंग कमेटी के गठन और वेंडर्स सर्वे को जल्द पूरा करने का निर्देश। |
| मुख्य प्रभाव | दिल्ली के करीब 5 लाख रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को प्रशासनिक उत्पीड़न से राहत। |





