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GAUHATI HC: पॉक्सो पीड़ितों की शीघ्र पेशी के निर्देश

GAUHATI HC: पॉक्सो पीड़ितों की शीघ्र पेशी के निर्देश

GAUHATI HC: गौहाटी हाईकोर्ट ने पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) के तहत पीड़ित बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया

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GAUHATI HC: गौहाटी हाईकोर्ट ने पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) के तहत पीड़ित बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के माध्यम से पीड़ित बच्चों को शीघ्र बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee – CWC) के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जाएगा।

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यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में जारी किए गए हैं, जिनमें “इन रे: राइट टू प्राइवेसी ऑफ एडोलसेंट” [सुओ मोटो रिट याचिका (सी) नंबर 3/2023] में विशेष निर्देश दिए गए थे।

GAUHATI HC: सुप्रीम कोर्ट का आदेश और उसका आधार

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ध्यान आकर्षित किया कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 19(6) के तहत बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि जब बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने की सूचना दी जाती है, तब भी समिति उचित कार्रवाई करने में विफल रहती है।

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इस मुद्दे के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विधि सचिवों को आदेश दिए थे कि वे इस मामले में जरूरी कदम उठाएं और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के प्रावधानों के पालन को सुनिश्चित करें।

गौहाटी हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मद्देनजर निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं, ताकि पॉक्सो मामलों में पीड़ित बच्चों की देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके:

  1. बाल कल्याण समिति को सूचना भेजने का निर्देश
    जब विशेष कोर्ट (पॉक्सो) या संबंधित क्षेत्रीय सत्र न्यायालय को पुलिस द्वारा धारा 19(6) के तहत पीड़ित बच्चों की देखभाल और पुनर्वास के लिए सूचना प्राप्त होती है, तो उस सूचना को तुरंत बाल कल्याण समिति को भेजा जाएगा। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि पीड़ित बच्चों को शीघ्रता से बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाए।
  2. पुलिस यूनिट की विफलता पर कार्रवाई
    यदि विशेष किशोर पुलिस इकाई (Special Juvenile Police Unit) पीड़ित बच्चों की देखभाल और संरक्षण से संबंधित रिपोर्ट देने में विफल रहती है और बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश नहीं किया जाता है, तो विशेष कोर्ट या सत्र न्यायालय संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को इस मामले में रिपोर्ट करेगा, ताकि अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
  3. बाल कल्याण समिति की विफलता पर कार्रवाई
    यदि बाल कल्याण समिति पीड़ित बच्चों के उचित पुनर्वास के लिए कार्रवाई नहीं करती है, तो विशेष कोर्ट या सत्र न्यायालय संबंधित जिले के जिला आयुक्त को सूचित करेगा, ताकि किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी हो सके।
  4. विशेष कोर्ट द्वारा नियम 4(10) का पालन
    पॉक्सो नियम, 2020 के तहत यदि किसी बच्चे को समर्थन प्रदान किया गया है, तो विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस 24 घंटे के भीतर इसकी सूचना विशेष कोर्ट को देगी। यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चों को तुरंत कानूनी सहायता मिल सके।
  5. आरोपी के साथ रहने वाले बच्चों की सुरक्षा
    यदि विशेष कोर्ट को यह जानकारी मिलती है कि अपराध से पीड़ित बच्चा आरोपी के साथ रह रहा है, तो कोर्ट तुरंत बाल कल्याण समिति को सूचित करेगा और बच्चे के पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देगा।
  6. वार्षिक रिपोर्ट की मांग
    विशेष कोर्ट बाल कल्याण समिति से जनवरी माह में उन बच्चों की वर्तमान स्थिति और पुनर्वास की जानकारी के लिए वार्षिक रिपोर्ट मांगेगा, जो अपराध के शिकार हैं और जिन्हें देखभाल एवं संरक्षण का हक है।
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GAUHATI HC: सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य और प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विधि सचिव यह सुनिश्चित करें कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बनाए गए नियम प्रभावी रूप से लागू हों। साथ ही, पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों के शिकार बच्चों को पूर्ण संरक्षण और पुनर्वास मिल सके। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पीड़ित बच्चों को उचित देखभाल और पुनर्वास के लिए कानून की पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाए।

गौहाटी हाईकोर्ट के द्वारा जारी किए गए निर्देश पॉक्सो मामलों में पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्देशों से यह सुनिश्चित होगा कि पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों को समय पर न्याय मिले और उनकी देखभाल के लिए जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएं।

इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि बाल कल्याण समिति की भूमिका को सशक्त बनाया जाए और पीड़ित बच्चों को उचित संरक्षण और पुनर्वास प्रदान किया जाए।

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