KARNATAKA HIGH COURT: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि यदि नीलामी में खरीदार निर्धारित समय सीमा के भीतर संपत्ति की बिक्री की शेष राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो अग्रिम धनराशि (अर्नेस्ट मनी) की जब्ती अनिवार्य है। यह निर्णय कैनरा बैंक द्वारा दायर एक रिट अपील में दिया गया, जिसमें बैंक ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नीलामी खरीदार को 3.25 करोड़ रुपये की राशि लौटाने का निर्देश दिया गया था।
बैंक ने नीलामी खरीदार के लिए तय समय सीमा के भीतर शेष राशि न जमा करने के चलते यह अपील दायर की थी, जिसमें अग्रिम धनराशि की जब्ती का प्रावधान था।
KARNATAKA HIGH COURT: मामले का संक्षिप्त विवरण:
यह मामला 2021 की एक संपत्ति नीलामी से जुड़ा है, जिसे कैनरा बैंक ने परिसंपत्ति पुनर्निर्माण और वित्तीय संपत्ति सुरक्षा अधिनियम, 2002 (SARFAESI Act) के तहत आयोजित किया था। बैंक ने संपत्ति नीलामी के माध्यम से बकाया राशि की वसूली के लिए यह कदम उठाया। नीलामी प्रक्रिया के दौरान, प्रतिवादियों ने सफलतापूर्वक बोली लगाई और संपत्ति को 3.25 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि (कुल बोली राशि का 25%) का भुगतान करके खरीदा। इसके बाद, बोली के शर्तों के अनुसार शेष 75% राशि यानी 9.75 करोड़ रुपये 15 दिनों के भीतर जमा करनी थी।
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बोली प्रक्रिया के तहत, बिक्री की पुष्टि प्रतिवादियों के पक्ष में हो गई, और उन्हें शेष राशि का भुगतान करने के लिए सूचित किया गया। हालांकि, 13 जनवरी, 2022 को प्रतिवादियों ने 30 दिनों का समय विस्तार मांगा, और बैंक ने उन्हें 28 जनवरी तक शेष राशि जमा करने के लिए कहा। फिर भी, निर्धारित तिथि पर प्रतिवादियों ने फिर से 30 दिनों का विस्तार मांगा और यह जानकारी दी कि वे एचडीएफसी बैंक के साथ ऋण प्रक्रिया में थे, जिसके कारण देरी हो रही थी।
बैंक ने उसी दिन उत्तर दिया कि यदि शेष राशि 10 फरवरी, 2022 तक जमा नहीं की जाती, तो नीलामी रद्द कर दी जाएगी और पहले से जमा की गई अग्रिम धनराशि जब्त कर ली जाएगी। प्रतिवादियों द्वारा शेष राशि का भुगतान न किए जाने पर, बैंक ने अग्रिम धनराशि जब्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद, प्रतिवादियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एकल न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने बैंक से अपनी अग्रिम धनराशि की वापसी का अनुरोध किया। एकल न्यायाधीश ने प्रतिवादियों की याचिका मंजूर कर ली और बैंक को धनराशि लौटाने का निर्देश दिया।
इस आदेश से असंतुष्ट होकर, कैनरा बैंक ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की। बैंक का तर्क था कि नीलामी की शर्तों के अनुसार, यदि बोलीदाता निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो अग्रिम धनराशि की जब्ती का प्रावधान लागू होता है।
KARNATAKA HIGH COURT: कानूनी दृष्टिकोण
मुख्य न्यायाधीश एन.वी. अंजरिया और न्यायमूर्ति के.वी. अरविंद की खंडपीठ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शन्मुगवेलु मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि SARFAESI अधिनियम के तहत नीलामी की प्रक्रिया के दौरान नियम 9(5) के तहत यदि नीलामी खरीदार निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष राशि का भुगतान नहीं करता है, तो अग्रिम धनराशि की जब्ती का प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू होता है। कोर्ट ने कहा कि नियम 9(5) के अनुसार, खरीदार द्वारा शेष राशि का भुगतान न करने पर अग्रिम धनराशि की जब्ती अनिवार्य परिणाम है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि SARFAESI अधिनियम एक विशेष कानून है, जिसका सामान्य कानून पर वरीयता होती है। इस विशेष अधिनियम के तहत बनाए गए नियम और प्रावधान स्पष्ट रूप से उस स्थिति को परिभाषित करते हैं, जिसमें नीलामी खरीदार द्वारा समय पर भुगतान न किए जाने की स्थिति में अग्रिम धनराशि जब्त की जा सकती है। इस अधिनियम के तहत अधिकृत अधिकारी को दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह कानून विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों द्वारा वसूली की प्रक्रिया को गति देने के लिए बनाया गया है।
KARNATAKA HIGH COURT: खंडपीठ की टिप्पणी
खंडपीठ ने कहा, “नियम 9(5) के तहत अधिकृत अधिकारी को दिए गए अधिकार अनुचित नहीं हैं, क्योंकि यह अधिनियम सामान्य कानून की तुलना में विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय मामलों से संबंधित है। यदि नीलामी खरीदार निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो अग्रिम धनराशि की जब्ती का प्रावधान अनिवार्य है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में कोई विशेष परिस्थिति नहीं थी जो नीलामी खरीदार द्वारा अग्रिम धनराशि की वापसी की मांग को न्यायसंगत ठहरा सके। कोर्ट ने बैंक द्वारा अनुचित लाभ उठाने की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया और कहा कि नीलामी की शर्तों के तहत अग्रिम धनराशि की जब्ती का प्रावधान सही और कानूनी रूप से जायज है।
KARNATAKA HIGH COURT: न्यायालय का निर्णय
अंततः, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया और एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि नीलामी खरीदार द्वारा नियत समय में शेष राशि का भुगतान न किए जाने पर अग्रिम धनराशि की जब्ती का प्रावधान अनिवार्य है और बैंक को अग्रिम धनराशि की वापसी करने की आवश्यकता नहीं है।
कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले ने नीलामी प्रक्रिया में बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की स्थिति को और अधिक सशक्त किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नीलामी की शर्तों का उल्लंघन करने पर अग्रिम धनराशि की जब्ती एक अनिवार्य परिणाम है, और इसमें किसी भी प्रकार का अपवाद नहीं हो सकता। इस फैसले ने नीलामी खरीदारों के लिए यह संदेश दिया है कि समय सीमा का पालन अनिवार्य है और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती।
मामला शीर्षक: कैनरा बैंक बनाम सुब्रमण्य राव के. एवं अन्य
पक्षकारों की उपस्थिति:
अपीलकर्ता की ओर से: अधिवक्ता शेट्टी विग्नेश शिवराम
प्रतिवादी की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोंधी एवं अधिवक्ता ए.एस. रवि कुमार
यह निर्णय SARFAESI अधिनियम के तहत वित्तीय संस्थानों को अधिक सुरक्षा प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करता है कि नीलामी की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध रहे। इसके साथ ही, यह फैसला नीलामी खरीदारों को यह समझने की आवश्यकता पर बल देता है कि नीलामी के शर्तों का पालन अनिवार्य है, अन्यथा अग्रिम धनराशि की जब्ती अनिवार्य परिणाम होगा।









