MADHYA PRADESH HC: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि संशोधन आवेदन के जरिए किसी अपील को चुनाव याचिका में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय न्यायमूर्ति विनय साराफ की एकल पीठ ने दिया, जिसमें एक रिट याचिका पर सुनवाई की गई।
यह याचिका उपखंड अधिकारी (एसडीओ) द्वारा जारी एक आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जिसमें एसडीओ ने नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 6 नियम 17 के तहत संशोधन आवेदन को स्वीकृति दी थी।
MADHYA PRADESH HC: पंचायत चुनाव और विवाद
मामला चंचल गुप्ता बनाम राखी ढाली से जुड़ा हुआ है। इस मामले में याचिकाकर्ता और उत्तरदाता दोनों ने पंचायत के पंच पद के लिए चुनाव लड़ा। चुनाव के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने याचिकाकर्ता को विजयी घोषित किया। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर उत्तरदाता ने मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 91 के तहत अपील दायर की।
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अपील दायर होने के बाद, याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती दी और अपील की वैधता पर सवाल उठाया। इसके जवाब में उत्तरदाता ने CPC के आदेश 6 नियम 17 के तहत एक संशोधन आवेदन प्रस्तुत किया। इस आवेदन में अपील को चुनाव याचिका में परिवर्तित करने के लिए कुछ बदलावों का अनुरोध किया गया था, जैसे शीर्षक में ‘अपील’ की जगह ‘चुनाव याचिका’ और धारा 91 की जगह धारा 122 का उल्लेख।
MADHYA PRADESH HC: याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता राजस पोहांकर, ने इस संशोधन आवेदन का कड़ा विरोध किया और अपनी दलीलों में निम्नलिखित बिंदु उठाए:
- चुनाव याचिका दायर करने की प्रक्रिया सख्त और स्पष्ट है।
- चुनाव याचिका केवल अधिनियम की धारा 122 और मध्य प्रदेश पंचायत (चुनाव याचिका, भ्रष्ट आचरण और सदस्यता के लिए अयोग्यता) नियम, 1995 के नियम 3 के अनुसार ही दायर की जा सकती है।
- सुरक्षा राशि का अभाव।
- नियम 7 के तहत चुनाव याचिका दायर करते समय 500 रुपये की सुरक्षा राशि जमा करना अनिवार्य है। चूंकि अपील के साथ यह राशि जमा नहीं की गई थी, इसलिए इसे चुनाव याचिका में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
- सत्यापन और हलफनामे का अभाव।
- नियम 5 (सी) और CPC के आदेश 6 नियम 15 (4) के तहत चुनाव याचिका का सत्यापन और हलफनामे के साथ होना जरूरी है। अपील में न तो सत्यापन था और न ही हलफनामा प्रस्तुत किया गया।
- कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन।
- याचिकाकर्ता के अनुसार, बिना सुरक्षा राशि के चुनाव याचिका को स्वीकार करना नियमों का उल्लंघन है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।
MADHYA PRADESH HC: उत्तरदाता की दलीलें
उत्तरदाता के वकील राहुल राजपूत ने तर्क दिया कि:
- टाइपिंग त्रुटि।
- अपील में गलत प्रावधानों का उल्लेख और चुनाव याचिका की जगह अपील का उल्लेख एक टाइपिंग त्रुटि के कारण हुआ। इसे बाद में सुधारने का अधिकार उत्तरदाता को है।
- संशोधन की स्वीकृति।
- संशोधन आवेदन में केवल तकनीकी त्रुटियों को ठीक किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी प्रक्रिया में त्रुटियों को सही करने का मौका दिया जाना चाहिए।
- प्रक्रिया का पालन।
- उत्तरदाता ने यह भी कहा कि जब उन्हें त्रुटि का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत संशोधन के लिए आवेदन किया।
MADHYA PRADESH HC: हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
- अपील को चुनाव याचिका में बदला नहीं जा सकता।
- न्यायालय ने कहा कि अपील को केवल सही प्रावधानों का उल्लेख करके चुनाव याचिका में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
- कठोर नियमों का पालन अनिवार्य।
- चुनाव याचिका दायर करने के लिए नियम 5, 7 और 8 का सख्ती से पालन करना जरूरी है।
- सत्यापन और सुरक्षा राशि का अभाव।
- अपील में सत्यापन और सुरक्षा राशि का अभाव था, जिससे इसे चुनाव याचिका मानने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने कहा:
“चुनाव याचिका को सख्ती से नियमों के अनुसार दायर किया जाना चाहिए। संशोधन आवेदन के माध्यम से किसी अपील को चुनाव याचिका में परिवर्तित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, अगर नियमों का अनुपालन नहीं किया गया है।”
हाईकोर्ट ने उपखंड अधिकारी (एसडीओ) द्वारा पारित संशोधन आवेदन की स्वीकृति को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया।
मामला: चंचल गुप्ता बनाम राखी ढाली
पक्षकारों की उपस्थिति:
- याचिकाकर्ता: वरिष्ठ अधिवक्ता राजस पोहांकर
- उत्तरदाता: अधिवक्ता राहुल राजपूत
यह फैसला चुनाव कानूनों में सख्त अनुपालन की आवश्यकता को दोहराता है और यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रियात्मक खामियों के जरिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो।
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