तेजप्रताप की दरियादिली: पटना- बिहार की राजनीति के केंद्र में इन दिनों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का पारिवारिक संकट और तेजस्वी यादव के बेटे के जन्म की खबर सुर्खियों में है।
एक तरफ लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बेदखल कर दिया है, वहीं दूसरी ओर तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के बेटे के जन्म पर खुले दिल से शुभकामनाएं देकर राजनीतिक कटुता के बीच रिश्तों की गरिमा को बचाए रखने का संदेश दिया है।
भतीजे के जन्म पर तेज प्रताप का पोस्ट
तेज प्रताप यादव ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक भावनात्मक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा —
“श्री बांके बिहारी जी की असीम कृपा व आशीर्वाद से नवजात शिशु के आगमन (पुत्र रत्न की प्राप्ति) पर मुझे बड़े पापा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। छोटे भाई तेजस्वी प्रसाद यादव एवं राज श्री यादव को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भतीजे को मेरा स्नेहिल आशीर्वाद एवं शुभ प्यार।”
इस पोस्ट से स्पष्ट है कि पार्टी और पारिवारिक मतभेदों के बावजूद तेज प्रताप यादव ने अपने छोटे भाई के जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर पर सौहार्द बनाए रखा है।
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तेज प्रताप को क्यों निकाला गया पार्टी से?
तेज प्रताप यादव को लेकर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने हाल ही में कड़ा फैसला लिया। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की कि वे अपने ज्येष्ठ पुत्र तेज प्रताप को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर रहे हैं। इसके पीछे कारण बताया गया — तेज प्रताप के निजी जीवन और सार्वजनिक आचरण में लगातार गिरावट, जिससे पार्टी और परिवार की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
लालू यादव ने अपने आधिकारिक बयान में लिखा:
“निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमजोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। अतः उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि तेज प्रताप अब से पार्टी और परिवार के किसी भी निर्णय में शामिल नहीं होंगे, और उनसे संबंध रखना या न रखना पूरी तरह अन्य लोगों की “स्वविवेक” पर निर्भर करेगा।
विवाद की जड़ बनी थी एक तस्वीर
तेज प्रताप यादव को लेकर विवाद तब और गहराया जब उनके फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वे एक अज्ञात महिला के साथ नजर आ रहे थे। तस्वीर के साथ यह दावा किया गया कि दोनों पिछले 12 साल से रिलेशनशिप में हैं। इस पोस्ट के वायरल होते ही पार्टी में हलचल मच गई।
हालांकि तेज प्रताप ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था। उन्होंने उस फोटो को फेक और एआई जनरेटेड करार दिया। उनका आरोप था कि उन्हें बदनाम करने के लिए यह सब किया जा रहा है।
लालू ने दिया नैतिकता का संदेश
लालू प्रसाद यादव ने अपने लंबे बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि वे “लोकलाज” और “नैतिक मूल्यों” के हिमायती हैं और सार्वजनिक जीवन में ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर सकते। उनका यह रुख राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इससे यह भी संकेत मिला है कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है, चाहे वह उनका खुद का बेटा ही क्यों न हो।
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पारिवारिक मतभेदों ने पार्टी पर डाला असर
तेज प्रताप यादव का राजनीतिक सफर हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। एक समय वे बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भी रहे, लेकिन बाद में उनका प्रभाव घटता चला गया। दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने खुद को न केवल पार्टी का नेतृत्वकर्ता बल्कि विपक्ष के प्रमुख नेता के रूप में भी स्थापित किया। दोनों भाइयों के बीच मतभेद समय-समय पर सार्वजनिक होते रहे हैं।
इस पारिवारिक टकराव का असर अब पार्टी के ढांचे पर भी दिखने लगा है। जहां तेजस्वी को पार्टी में पूरी तरह से समर्थन मिल रहा है, वहीं तेज प्रताप अब राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं।
शुभकामनाओं में छिपा राजनीतिक संकेत?
हालांकि तेज प्रताप यादव ने अपने पोस्ट में स्नेह और सम्मान प्रकट किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट सिर्फ पारिवारिक भावना नहीं, बल्कि एक “राजनीतिक संकेत” भी हो सकता है। यह शायद यह जताने की कोशिश हो कि वह अब भी पारिवारिक मूल्यों को मानते हैं और दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
श्री बांके बिहारी जी के असीम कृपा व आशीर्वाद से नवजात शिशु के आगमन ( पुत्ररत्न की प्राप्ति ) पर मुझे बड़े पापा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है..छोटे भाई तेजस्वी प्रसाद यादव एवं राज श्री यादव को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं…भतीजे को मेरा स्नेहिल आशीर्वाद एवं शुभ प्यार..… pic.twitter.com/BateZ0fN5d
— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) May 27, 2025
तेजस्वी के बेटे के जन्म ने पिघलाया राजनीतिक बर्फ?
तेज प्रताप यादव का यह कदम—जिसमें उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपने भाई और भाभी को बेटे के जन्म पर बधाई दी—यह दर्शाता है कि राजनीति और पारिवारिक संबंधों को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता। पार्टी और परिवार से बेदखल होने के बावजूद उन्होंने अपने रिश्ते का फर्ज निभाया और यही बात उन्हें जनता की नजरों में एक ‘संवेदनशील नेता’ के रूप में प्रस्तुत करती है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भविष्य में यह पारिवारिक दरार सुलझती है या तेज प्रताप यादव कोई अलग राजनीतिक राह अपनाते हैं। लेकिन इतना तो साफ है कि तेजस्वी यादव के बेटे के जन्म ने परिवार में एक भावनात्मक अवसर तो जरूर दिया है, चाहे वह राजनीतिक समीकरणों पर असर डाले या नहीं।








