Northern Railway Rajpura Bypass Line को ₹411.96 करोड़ की मंजूरी मिलने से होगा देश का विकास ओर जनता को होगी आसानी । 13.46 किमी नई रेल लाइन से नॉर्दर्न रेलवे का जाम खत्म होगा , फ्रेट और पैसेंजर ट्रेनें तेज होंगी ओर समय बचेगा —जानें इस मेगा प्रोजेक्ट की पूरी खबर।
Northern Railway Rajpura Bypass Line: नॉर्दर्न रेलवे कॉरिडोर को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम
रिपोर्ट: मोहम्मद रफ़ी
रेल मंत्रालय ने देश के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए Northern Railway Rajpura Bypass Line परियोजना को मंजूरी दे दी है। ₹411.96 करोड़ की लागत से तैयार होने वाला यह प्रोजेक्ट नॉर्दर्न रेलवे के सबसे व्यस्त माने जाने वाले सेक्शनों में भीड़भाड़ कम करने और ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है।
नई दिल्ली में इस संबंध में जानकारी देते हुए केंद्रीय रेल राज्य मंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री एस. रवनीत सिंह ने बताया कि परियोजना को रेल मंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद रेलवे बोर्ड के समर्थन से आधिकारिक मंजूरी प्रदान की गई है। यह परियोजना क्षेत्र में रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
Rajpura Bypass Line: व्यस्त रेल मार्ग पर दबाव कम करने की तैयारी
Rajpura Bypass Line के तहत 13.46 किलोमीटर लंबी बाईपास रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। यह लाइन न्यू शंभू डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) स्टेशन को मौजूदा राजपुरा-बठिंडा लाइन पर स्थित काउली स्टेशन से जोड़ेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह रणनीतिक लिंक भारतीय रेल के “Umbrella Work 2025-26” कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत देशभर में नई रेल लाइनों के निर्माण और क्षमता विस्तार पर काम किया जा रहा है। इस परियोजना का प्रमुख लक्ष्य राजपुरा यार्ड पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को कम करना है, जो वर्तमान में लगभग संतृप्त क्षमता पर संचालित हो रहा है।
राजपुरा यार्ड लंबे समय से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन बिंदु रहा है। बढ़ते रेल यातायात के कारण यहां ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी थी, जिससे परिचालन दक्षता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। बाईपास लाइन के निर्माण से ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा और यार्ड पर निर्भरता कम होगी।
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Rajpura Bypass Line: माल और यात्री ट्रेनों के संचालन को मिलेगा नया मार्ग
Northern Railway Rajpura Bypass Line परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे ट्रेनों को राजपुरा यार्ड के भीड़भाड़ वाले हिस्से से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। नई लाइन सीधे कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे ट्रेनें बिना बाधा अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ सकेंगी। अंबाला-जालंधर सेक्शन नॉर्दर्न रेलवे नेटवर्क के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में शामिल है। रेलवे के अनुमान के मुताबिक, यदि समय रहते कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो वर्ष 2030-31 तक इस क्षेत्र में लाइन क्षमता उपयोग 165 प्रतिशत से अधिक हो सकता है।
ऐसी स्थिति में देरी, परिचालन बाधाएं और नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका रहती है। बाईपास लाइन इन संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है, ताकि ट्रैफिक प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक संतुलित होने की उम्मीद है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि ट्रेनों के शेड्यूल को बनाए रखना भी आसान होगा।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से सीधी कनेक्टिविटी
इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता न्यू शंभू स्थित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उद्देश्य माल परिवहन को तेज और अधिक कुशल बनाना है, ताकि यात्री ट्रेनों पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सके।
सीधी कनेक्टिविटी स्थापित होने के बाद मालगाड़ियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और लॉजिस्टिक्स संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से सहूलियत मिलने की संभावना है, क्योंकि तेज परिवहन किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि फ्रेट मूवमेंट में सुधार से सप्लाई चेन अधिक व्यवस्थित होगी और माल परिवहन में लगने वाला समय घटेगा।
रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर जोर
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेल ने बढ़ते यातायात को देखते हुए क्षमता विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है, जिससे वैकल्पिक लाइनों और बाईपास की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Northern Railway Rajpura Bypass Line इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नेटवर्क को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। क्षमता विस्तार से न केवल वर्तमान दबाव कम होगा बल्कि आने वाले वर्षों में संभावित वृद्धि को भी संभालना आसान होगा। रेल मंत्रालय का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं रेल संचालन को अधिक लचीला बनाती हैं और नेटवर्क की समग्र विश्वसनीयता को मजबूत करती हैं।
परिचालन दक्षता में सुधार की उम्मीद
रेल परिचालन में दक्षता बनाए रखना एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें समय प्रबंधन, मार्ग उपलब्धता और ट्रैफिक संतुलन जैसे कई कारक शामिल होते हैं। जब किसी यार्ड या सेक्शन पर दबाव बढ़ता है, तो उसका प्रभाव पूरे नेटवर्क पर पड़ सकता है।
बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग मिलने से परिचालन योजना अधिक प्रभावी तरीके से लागू की जा सकेगी। इससे देरी की संभावना कम होगी और ट्रेनों की औसत गति बनाए रखने में सहायता मिलेगी। रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स दीर्घकालिक परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति और प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री एस. रवनीत सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इस परियोजना को सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद मंजूरी दी गई है। रेलवे बोर्ड के समर्थन के पश्चात इसे औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
परियोजना को “Umbrella Work 2025-26” के अंतर्गत शामिल किया गया है, जो भारतीय रेल के विभिन्न नए लाइन कार्यों के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। इस ढांचे के तहत उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है जहां क्षमता विस्तार या नई कनेक्टिविटी की आवश्यकता है।
राजपुरा यार्ड की वर्तमान स्थिति
राजपुरा यार्ड नॉर्दर्न रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन केंद्र है। यहां से गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या अधिक होने के कारण यह लंबे समय से व्यस्त श्रेणी में शामिल रहा है। जब कोई यार्ड संतृप्त क्षमता के करीब पहुंच जाता है, तो ट्रेनों के ठहराव की अवधि बढ़ सकती है और परिचालन तालमेल बनाए रखना कठिन हो सकता है। यही कारण है कि रेलवे ने इस स्थिति का समाधान खोजने के लिए बाईपास लाइन का विकल्प चुना। नई लाइन के निर्माण से यार्ड पर निर्भरता घटेगी और ट्रेनों को अधिक सीधे मार्ग उपलब्ध होंगे।
रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण परियोजना
रेल अवसंरचना में निवेश को अक्सर दीर्घकालिक योजना के रूप में देखा जाता है। एक बार नई लाइन या कनेक्टिविटी विकसित होने पर उसका लाभ वर्षों तक मिलता है। Northern Railway Rajpura Bypass Line को भी इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, क्योंकि यह केवल वर्तमान समस्या का समाधान नहीं बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही परियोजना है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और यात्रा की बढ़ती मांग को देखते हुए रेल नेटवर्क पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में समय रहते क्षमता बढ़ाना परिचालन निरंतरता के लिए आवश्यक माना जाता है।
क्षेत्रीय रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा
रेल मंत्रालय ने इस स्वीकृति को क्षेत्र में आधुनिक रेल अवसंरचना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। आधुनिक ट्रैक, बेहतर कनेक्टिविटी और वैकल्पिक मार्ग किसी भी बड़े रेल नेटवर्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब नेटवर्क का विस्तार योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है, तो इससे यातायात का दबाव संतुलित रहता है और सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
ट्रैफिक वृद्धि के अनुमान और तैयारी
रेलवे द्वारा किए गए आकलन के अनुसार अंबाला-जालंधर सेक्शन में आने वाले वर्षों में ट्रैफिक तेजी से बढ़ सकता है। यदि मौजूदा ढांचे पर ही निर्भर रहा जाए, तो क्षमता उपयोग निर्धारित सीमा से काफी ऊपर जा सकता है। इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयारी करना आवश्यक होता है। बाईपास लाइन इसी तैयारी का हिस्सा है, ताकि ट्रेनों की संख्या बढ़ने पर भी नेटवर्क सुचारु रूप से संचालित हो सके।
परियोजना से जुड़े तकनीकी आयाम
13.46 किलोमीटर लंबी इस लाइन का निर्माण इंजीनियरिंग और परिचालन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई लाइन को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वह मौजूदा नेटवर्क के साथ सहज रूप से जुड़ सके। रेलवे परियोजनाओं में ट्रैक अलाइनमेंट, सिग्नलिंग, सुरक्षा मानक और परिचालन अनुकूलता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।
आधिकारिक बयान में क्या कहा गया
केंद्रीय राज्य मंत्री एस. रवनीत सिंह ने कहा कि यह स्वीकृति क्षेत्रीय रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने और देश की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नई बाईपास लाइन ट्रेनों को सीधे मार्ग प्रदान करेगी और राजपुरा यार्ड पर मौजूद बाधाओं को कम करने में सहायक होगी।
रेलवे की व्यापक विकास नीति के अनुरूप पहल
भारतीय रेल लगातार उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिनसे नेटवर्क की दक्षता बढ़े और परिचालन अधिक सुचारु हो सके। नई लाइनों, डबलिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन और फ्रेट कॉरिडोर जैसी पहलों के साथ बाईपास परियोजनाएं भी इसी नीति का हिस्सा हैं। Rajpura Bypass Line को इस व्यापक दृष्टिकोण के तहत देखा जा रहा है, जहां लक्ष्य केवल ट्रैफिक कम करना नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाना है।








